गंगा को किया जाए बांधों से मुक्त

Bhadohi Updated Tue, 22 May 2012 12:00 PM IST
ज्ञानपुर। भदोही लोकसभा के सांसद गोरखनाथ पांडेय ने लोकसभा में गंगा नदी और हिमालय के संरक्षण पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सदन में आवाज उठाई। कहा कि देश की अस्मिता को बचाने के लिए हमारी आस्था की प्रतीक गंगा नदी की अविरल धारा को प्रवाहित रहने तथा प्रदूषण से बचाने के लिए गंगा को बांधों से मुक्त करें। वाराणसी तथा देश के अन्य भागों में हो रहे आंदोलन के दर्द को समझें। गंगा नदी तथा हिमालय पर्वत की सुरक्षा, संरक्षा के लिए ठोस कार्रवाई करें।
गोरखनाथ पांडेय ने नियम 193 के तहत चल रही चर्चा के दौरान गंगा नदी के सुरक्षा का मुद्दा उठाया। कहा कि गंगा नदी ही नहीं हमारी मां हैं। यह जाति, संप्रदाय, धर्म और समुदाय के ऊपर उठकर आदरणीय हैं। गंगा मानव जाति के एकता के सूत्र में पिरोती आई हैं। यह हमारी आस्था की प्रतीक हैं और इन्हें राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया है। आज इनकी अविरल धारा प्रभावित हो रही है और प्रदूषित हो रही है। कहा कि गंगा नदी से हमारा संबंध जन्म लेते ही शुरू हो जाता है और मृत्यु तक चलता रहता है। हमारे देश की पवित्र नदी ही नहीं यह जीवनधारा हैं। गंगा देश के छह प्रांतों से 2525 किलोमीटर तक चलकर 40 प्रतिशत लोगों के जीवन से संबंध रखती हैं। वेदों में कहा गया है गंगा तव दर्शनात मुक्ति:। कहा कि गंगा प्रदूषित हो गई हैं। 29 शहरों से होकर बहती है। फैक्ट्री का गंदा पानी गंगा नदी में उड़ेला जा रहा है। हम गंगा एक्शन प्लान के तहत करोड़ों रुपये सफाई पर खर्च कर रहे हैं, लेकिन यह सफेद हाथी साबित हो रहा है। गंगा की अविरल धारा रोकी जा रही है। इन्हें सुरंगों से निकाला जा रहा है। प्रारंभ में ही उद्गम स्थल के बाद कई बांधों का निर्माण किया गया है। इको जोन में भी बांध बनाए जा रहे हैं। देश की सभ्यता संस्कृति की धरोहर गंगा मां को कहा ले जाना चाहते हैं। सांसद ने कहा कि आस्था की प्रतीक गंगा मैली ही नहीं उनका लोप होने जा रहा है। इससे हमारी संस्कृति समाप्त हो जाएगी। गंगा की पवित्रता एवं अविरल धारा के लिए आंदोलन हो रहा है धरना प्रदर्शन हो रहा है। भदोही क्षेत्र पवित्र नगरी काशी व तीर्थराज प्रयाग के मध्य में स्थित है। हमारा गांव गंगा नदी के तट पर बसा है। हमने 40 वर्ष पूर्व की गंगा नदी को देखा है और आज गंगा नदी की दुर्दशा को भी देख रहे हैं। उन्होंने सभापति के माध्यम से देश की अस्मिता को बचाने के लिए आस्था की प्रतीक गंगा नदी के अविरल धारा के प्रवाहित रहने तथा प्रदूषण से बचाने के लिए गंगा को बांधों से मुक्त किया जाए। इस विषय को करेंट लिस्ट में डालकर हस्तक्षेप करें। वाराणसी सहित अन्य स्थानों पर हो रहे आंदोलन के दर्द को समझें। केवल सदन में जवाब देकर इतिश्री न करें। यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती तो देश में आंदोलन होगा। गंगा हमारी मां है मां की रक्षा करना हमारा धर्म ही नहीं कर्तव्य भी है।

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