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जीवन में माता, पिता, गुरु का स्थान सर्वोपरि

Bhadohi Updated Wed, 16 May 2012 12:00 PM IST
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जंगीगंज। डीघ विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय सदाशिवपट्टी में प्रवचन करते हुए श्री संत जी महाराज ने कहा कि माता पिता और गुरु की वाणी का अनुसरण करने वाला व्यक्ति सदा सुखी होता है।
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अयोध्या से पधारे श्री संत जी महाराज ने व्यक्ति के जीवन में माता पिता और गुरु को सर्वाधिक मान देते हुए कहा कि जीवन को शैशवास्था से ही मां बाप के लालन पालन के साथ ही साथ उन्हें इस संसार के विषमताओं के विषय में प्रथम परिचय माता ही कराती है। इसलिए शिशु सबसे पहले अपनी मां को ही पहचानता है। फिर अपने पिता को जो उसकी अन्य शंकाओं से पर्दा उठाता है। माता पिता से परिचित होने के बाद बच्चा धीरे-धीरे अन्य परिवारीजन में घुलता मिलता है। वह जब गुरु की शरण में आता है तो गुरु उसे इस भव सागर से पार करने की नौका की सवारी सिखलाते हैं। माता पिता और गुरु तीनों की शिक्षा प्राप्त करने के बाद ही जीव पूर्ण होता है। तीनों सदैव हित ही सोचते हैं। समय समय पर अनुशासन के साथ ही दंड भी देते हैं। यह यातना भी हित के लिए ही होता है न कि किसी द्वेशवश होता है। मनुष्य के जीवन में माता पिता व गुरु का स्थान सर्वोपरि है। इनके मुख से निकली हुई हर बात को उपदेश मानकर मनुष्य को अनुसरण करना चाहिए। आगे उन्होंने कहा कि माता पिता व गुरु की भलाई भी अपने शिष्य के कल्याण में ही है। जिस तरह सुपुत्र होने पर माता पिता को सुख मिलता है उसी तरह ज्ञानी शिष्य होने पर गुरु को भी अतुलनीय सुख व सम्मान मिलता है।

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