नीलगाय के झुंडों ने बर्बाद की सैकड़ों बीघा फसल

Badaun Updated Wed, 25 Jun 2014 05:33 AM IST
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उझानी (बदायूं)। कटरी से जुड़ा इलाका नीलगायों के आतंक की जद में है। कोई झुंड ऐसा नहीं जिसमें दर्जनभर से कम नीलगाय नजर आएं। नीलगायों ने सर्वाधिक नुकसान मक्का उत्पादकों को पहुंचाया है। सैकड़ों बीघा फसल नीलगायों के झुंड की भेंट चढ़ गई है।
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नीलगायों के झुंड यूं तो जिले में प्रत्येक इलाके में नजर आते हैं लेकिन सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र गंगा की कटरी से जुड़ा है। झुंड में शामिल नीलगायों की नजर जिस ओर फसल पर पड़ जाए, उसी तरफ की फसलें उनका निवाला बन जाती हैं। पालेज पर भी नीलगायों का साया पड़ा। तरबूज और खरबूज खाये तो कम लेकिन झुंडों की दस्तक से फूटकर बर्बाद ज्यादा हो गए। अगेती मक्का को नीलगायों ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों की मानें तो गुन्नौर से लेकर उसहैत क्षेत्र की पूरी बेल्ट में नीलगाय के झुंड आक्रमक होकर गुजरते हैं।
दलहन उत्पादकों को अभी से ज्यादा नुकसान की आशंका सताने लगी है। कटरी के गांव रमनगला निवासी प्रेमपाल ने बताया कि मटर, उड़द, ग्वार को नीलगाय गटक जाते हैं। दिन में तो फसलों की रखवाली कर भी ली जाती है लेकिन रात में जंगली सुअर और बदमाशों की होने की आशंका से ग्रामीण खेतों की ओर रुख नहीं करते। जंगली सुअर भी फसलों को नुकसान पहुंचाते रहे हैं। खासकर बाढ़ के दिनों में जंगली सुअरों का आतंक बढ़ जाता है।
इलाके से गायब हो चुकी है मूंगफली
मूंगफली की फसल करीब डेढ़ दशक पहले तक कटरी और भूड़ के खेतों की पहचान हुआ करती थी। बंपर पैदावार से उत्पादक भी खुशहाल थे लेकिन नीलगायों के झुंड मूंगफली वाले खेतों की दूर से सूंघ कर पहुंचते रहे। नीलगायों की वजह से किसानों को मूंगफली की ओर से मोहभंग हो गया। अब तो काश्तकार उन्हीं इलाकों में मूंगफली की फसल करते हैं जहां नीलगायों की संख्या कम है।
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