भारतीय संस्कृति और संस्कारों में रची-बसी है मां

Badaun Updated Wed, 07 May 2014 05:31 AM IST
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बदायूं। सर्व समाज जागरूकता अभियान के तत्वावधान में जोगीपुरा स्थिति प्रतिष्ठान पर बैठक हुई। इसमें मदर्स-डे पर मां की महत्ता पर प्रकाश डाला गया।
अभियान के राष्ट्रीय संयोजक माधव मिश्र ने कहा कि जन्म देने वाली मां साक्षात ईश्वर का स्वरूप होती है। पूरे जीवन कष्ट उठाकर वह अपने बच्चों को सुख देते हुए उनका पालन-पोषण करती है। भारतीय संस्कृति और संस्कारों में मां रची बसी है। मां के महत्व का गुणगान और महिमा का बखान सिर्फ विशेष दिवस पर न करके हर मौके पर करना चाहिए, क्योंकि मां जैसा कोई नहीं होता है। उन्होंने बच्चों को मां का ध्यान रखने के अलावा उनका सम्मान करने पर जोर दिया। कहा, मां ही बच्चे की पहली गुरु होती है। मां के चरणों में ही स्वर्ग होता है।
संस्कार भारती के जिलाध्यक्ष अशोक खुराना ने मां की महिमा का वर्णन कुछ इस तरह किया-
मां ने आंखे खोल दीं, घर में उजाला हो गया।
डॉ. विष्णु प्रकाश मिश्र ने मां को संस्कारों की खान बताया। इस मौके पर सुबोध गोयल, प्रमोद कुमार शर्मा, रानी शर्मा, रामप्रकाश सिंह राठौर, हरेंद्र सिंह मनचंदा, सुरेश पाल सिंह, वीरेंद्र पाल गुप्ता, नरेश कुमार सक्सेना आदि मौजूद रहे।
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