पट्टी वाले बाबा के उर्स में जुटे अकीदतमंद

Badaun Updated Wed, 07 May 2014 05:31 AM IST
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उझानी (बदायूं)। हजरत हसन मियां साहब रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स सोमवार रात को पूरे जोशोखरोश और अकीदत के साथ मनाया गया। कव्वालियों का मुकाबला भी जोरदार रहा। कव्वाल आंचल परवीन और गुलाम साबरी दोनों ही एक-दूसरे पर भारी नजर आए। मुकाबला बराबरी का रहा।
मानकपुर रोड स्थित रहमतुल्लाह अलैह की मजार पर उर्स में जुटे अकीदतमंदों नेेे चादरपोशी भी की। पट्टी वाले बाबा के नाम से मशहूर रहमतुल्लाह अलैह की शान में देर शाम से कव्वालों ने कसीदे कढ़े। जलसे का आगाज गुलाम साबरी की मनकवत से हुआ। गुलाम साबरी ने दीवानों आओ-आओ इस महफिल चिश्ती में, ख्वाजा बना है दूल्हा अजमेर की बस्ती में, सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कलाम भी पेश किया।
आंचल परवीन ने मां के कदमों के नीचे जन्नत बताई। दहेज प्रथा पर वार करती हुए आंचल ने कहा-ऊंचे-ऊंचे नामों की तख्तियां जला देना, घर जलाने से पहले बस्तियां जला देना, हक तुम्हें पहुंचता है तब बहू जलाने का, पहले अपने आंगन में बेटियां जला देना। गुलाम साबरी और आंचल परवीन के बीच कव्वाली का मुकाबला तड़के तक चला। आंचल ने अपनी पेशकश से जहां समाज को जागरूक करने का काम किया वहीं गुलाम साबरी ने श्रोताओं की नब्ज टटोलकर मौजूदा हालात की दास्तां भी कव्वाली के जरिए बयां कर दी।
इलाके के उलेमा ने भी शिरकत करके उर्स में जान फूंक दी। उन्होंने कौम और मुल्क के लिए भी दुआ की। तड़के कुल की फातियां के साथ अकीदतमंदों को तवर्रुफ भी बांटा गया। मजार के सज्जादानशीन रहम अली शाह ने कव्वालों और उलेमाओं को शान और शौकत के साथ रुखसत कराया। जायरीनों ने भी कुल की रस्मों में हिस्सा लिया। उर्स कमेटी के निराले अल्वी, शमशाद सिद्दीकी, जफरुद्दीन गौरी, नूरहसन गौरी, डा. अशरफ, शान मोहम्मद, शमशुल, जमीर खान, डा. शफातुल्लाह और मुजाहिद अब्बासी का व्यवस्थाओं में खास सहयोग रहा।
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