आखिर कब रुकेगी पानी की बर्बादी

Badaun Updated Wed, 07 May 2014 05:31 AM IST
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बदायूं। रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून...कवि शिरोमणि रहीम का यह गूढ़ अर्थ रखने वाला दोहा मौजूदा दौर में फिर प्रासंगिक हो चला है। अपने जिले की बात करें तो पानी की बर्बादी से पैदा होने वाला खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बावजूद इसके जिस तरह से पानी बर्बाद हो रहा है हम उस पर गौर तक नहीं करते। धरती की कोख खाली हो रही है। जल संरक्षण के लिए कोई इंतजाम नहीं हो रहे बल्कि दिन-प्रतिदिन भूगर्भ जल का दोहन बढ़ता जा रहा है। बर्फखाने, मिनरल वाटर प्लांट और वाहनों की धुलाई करने से संबंधित सर्विस सेंटर बेरोक टोक धरती की कोख खाली कर रहे हैं। पानी की बर्बादी रोकने के लिए आमजन और प्रशासन कतई गंभीर नजर नहीं आते। रोज हजारों लीटर पानी नालियों में बह जाता है।
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शहर में चल रहे 14 बर्फखाने
शहर के अलग-अलग इलाकों में 14 बर्फखाने धरती की कोख को खाली कर रहे हैं। इन बर्फखानों में लगे उच्च क्षमता के वाटर प्लांट रोज हजारों लीटर भू-गर्भ जल खींच लेते हैं। इस पानी से बर्फ जमाई जाती है और बाद में ये शहर समेत आसपास के इलाकों में सप्लाई हो जाती है। स्थिति लगातार बिगड़ रही है लेकिन जल दोहन की कोई सुध नहीं ले रहा।
मिनरल वाटर प्लांट सोख रहे भूगर्भ जल
बिना लाइसेंस पानी का कामर्शियल इस्तेमाल किसी से छिपा हुआ नहीं है। शहर के अलग-अलग इलाकों में दस मिनरल वाटर प्लांट चल रहे हैं। यहां भी भूगर्भ जल सोखा जा रहा है। रोज हजारों लीटर पानी मिनरल वाटर के नाम पर बेच दिया जाता है। धरती से पानी सोख कर मोटा कारोबार हो रहा है लेकिन भूगर्भ जल के रिचार्ज की किसी को फिक्र नहीं।

नालियों में पानी बहा रहे 19 सर्विस सेंटर
शहर में बिना लाइसेंस के चल रहे 19 सर्विस सेंटर हजारों लीटर पानी रोज नालियों में बहा देते हैं। वाहनों की धुलाई के नाम पर धरा की कोख खाली की जा रही है। इससे न सिर्फ राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि भविष्य के लिए जल संकट का खतरा भी पैदा हो रहा है। शहर में वाटर लेबल पहले ही 20 से 30 फीट नीचे खिसक चुका है।

सबको समझनी होगी जिम्मेदारी
जल संरक्षण के प्रति सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। हम भविष्य में आने वाले जल संकट को नजर अंदाज कर रहे हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए ये ठीक नहीं। स्थिति दिन व दिन बिगड़ रही है। भूगर्भ जल के संरक्षण के लिए शासन स्तर से भी ठोस प्रयास होने चाहिए। -महेश शर्मा

भविष्य के खतरे को पहचानना
भविष्य में आने वाले जल संकट को जिस तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है वह ठीक नहीं। लोगों को खतरे की घंटी समझनी होगी। जल के प्रति न तो लोग जिम्मेदारी समझ रहे हैं और न आने वाला खतरा। -अवनेश वर्मा
वाटर रिचार्जिंग में अब देरी ठीक नहीं
भूगर्भ जल की रिचार्जिंग में अब ज्यादा देरी ठीक नहीं। जरूरी है कि जिले में वाटर हार्वेस्टिंग प्लान जल्द लागू हो। अगर भूगर्भ जल में सुधार के लिए ठोस प्रयास जल्द शुरू नहीं हुए तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। जिले में पांच ब्लाक डार्क जोन में जाने के बाद से ही खतरे की घंटी बज रही है। -लायक अली, रिटायर्ड अभियंता, भूगर्भ जल
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