ओवरब्रिज के पास खड़ा पीपल का पेड़ कटेगा

Badaun Updated Tue, 06 May 2014 05:31 AM IST
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बदायूं। ओवरब्रिज के एक ओर आने वाले ब्रह्मदेव मंदिर में खड़े पीपल के पेड़ को कटवाने के लिए सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट और वन विभाग के एसडीओ मौका मुआयना करने पहुंचे। दोनाें अफसरों ने बाद में पीपल काटकर हटाए जाने को हरी झंडी देती है। वन विभाग की भी इसमें स्वीकृति है। अधिकारियों का मानना है कि पीपल का पेड़ सरकारी जगह पर है और उसे वहां से काटकर हटाया जा सकता है। वहीं सिविल लाइंस के लोग पहले भी इसे आस्था का केंद्र बताकर विरोध कर चुके हैं और लगभग तीन महीना पहले भी पीपल का पेड़ काटने गई टीम को क्षेत्रीय लोगों ने खदेड़ दिया था।
शहर में रेलवे लाइन पर बन रहे ओवरब्रिज के समीप ब्रह्मदेव मंदिर है और उसमें पीपल का पेड़ है। ओवरब्रिज का निर्माण यहां हो चुका है। ऊपरी स्लिप के समीप पीपल के पेड़ की एक टहनी आ रही है। ओवरब्रिज निर्माण में लगी संस्था सेतु निगम ने इस पेड़ का बाधा बताया था। इस पर प्रशासन ने करीब तीन माह पहले भी पीपल का पेड़ कटवाने का प्रयास किया। लकड़ी काटने वाले यहां पहुंचे लेकिन क्षेत्रीय लोगों ने उन्हें खदेड़ दिया था।
इसके बाद प्रशासन ने एक बार फिर प्रयास किया है। बताते हैं कि डीएम के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद यादव मौके पर पहुंचे। उनके साथ वन विभाग के एसडीओ ईश्वर दयाल भी थे। वन विभाग के एसडीओ ने साफ कहा है कि प्रशासन ने सुरक्षा साधनों का इंतजाम कराया तो पेड़ काटा जा सकता है। वन विभाग की हरी झंडी मिलते ही पीपल का पेड़ काटना तय माना जा रहा है। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि पीपल का पेड़ सरकारी जमीन पर है और मंदिर भी उसी जमीन पर है। इसलिए पेड़ का पूरा ही काटना होगा। वह मौके पर गए वहां किसी का कोई विरोध नहीं हुआ। पेड़ काटने से ओवरब्रिज बनने में बाधाएं दूर होंगी।
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आस्था से जुड़ा है ब्रह्मदेव मंदिर: ओमप्रकाश
सिविल लाइंस क्षेत्र में रह रहे ओमप्रकाश किराना वालों ने कहा है कि ब्रह्मदेव मंदिर पर पीपल का पेड़ नहीं कट सकता। पीपल का पेड़ इसी मंदिर में है। करीब डेढ़ सौ वर्षों से यहां पूजा हो रही है। क्षेत्र के व्यवसायी और अन्य लोगों की आस्था इससे जुड़ी हुई है। दूर-दूर से लोग यहां पूजा-अर्चना को पहुंचते हैं। कोई मंदिर किसी सरकारी जमीन पर नहीं होता है। किसी की आस्था से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। इस मंदिर और पेड़ से पूरे इलाके आस्था है। अगर, पेड़ को जड़ से काटा गया तोे वह विरोध करेंगे। इस संबंध में डीएम से बात भी की जाएगी।
पीपल का पेड़ कोई अड़ंगा नहीं: नवनीत
समाजवादी पार्टी से जुड़े व्यवसायी नवनीत कुमार ने कहा है कि सैकड़ों वर्ष पुराने मंदिर को प्रशासन सरकारी जगह बताने की भूल न करे। इसी मंदिर में पीपल का पेड़ है, जो वर्षों से आस्था का प्रतीक रहा है। अगर पीपल का पेड़ कटवाया गया तो क्षेत्र के लोगों की आस्था आहत होगी। व्यापारियों को जब इस मामले में जानकारी हुई तो उन्होंने जिलाधिकारी को वस्तुस्थिति से अवगत कराने का फैसला लिया है। पीपल का पेड़ काटने के फैसले का क्षेत्र में पूरा विरोध हो रहा है। वह पार्टी स्तर से भी इस संबंध में क्षेत्रों के लोगों की बात पहुंचाएंगे।
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