अंगदपुर में पुलिस की धमक

Badaun Updated Tue, 06 May 2014 05:31 AM IST
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दातागंज (बदायूं)। क्षेत्र के गांव अंगदपुर में भंडारा विवाद अभी शांत नहीं हुआ है। एसपी सिटी मानसिंह चौहान के आदेश पर सोमवार को इंस्पैक्टर कोतवाली वीपी सिंह मय पुलिस फोर्स के गांव जा धमके। उन्होंने चेताया कि गांव में खुराफात बंद हो जानी चाहिए। उन्होंने चेताया कि छुआछूत जहां अपराध है, वहीं जबरन किसी को खाने के लिए बाध्य करना भी इसी श्रेणी में आता है।
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यहां बता दे कि अंगदपुर में दातागंज से बसपा विधायक सिनोद शाक्य उर्फ दीपू भैया ने रुका हुआ भंडारा शुरू कराने का प्रयास किया था। इसे भी नाकामी मिली। रामवीर जाटव समेत जाटव समाज के लोग भंडारा में शामिल नहीं हुए। गांव में अन्य जातियों के अधिसंख्य लोगों ने इसमें भाग नहीं लिया। प्रधान कुंवरपाल और वे लोग जिन्होंने पंचायत कर और अन्य प्रयासों के साथ दोनों पक्षों को एक करने की कोशिश की, उन लोगों ने ही कुछ लोगों के साथ भंडारे का भोजन किया था। वह भी देर रात लोगों के इंतजार के बाद। इस मौके पर विधायक भी नहीं पहुंच सके थे।
पहली बार हुआ पुलिस का हस्तक्षेप
भंडारा विवाद को लेकर गांव अंगदपुर में अबतक राजनीतिक और सामाजिक लोगों के प्रयास हो रहे थे कि किसी प्रकार दोनों पक्षों में समझौता हो जाए और दोनो पक्ष एक साथ बैठकर भंडारे का भोजन करें लेकिन उनके कई दिनों तक चले प्रयास निष्फल रहे। राजस्व टीम ने भी हालातों पर अपनी रिपोर्ट एसडीएम को सौंप दी है। लेकिन पुलिस अबतक शांत पड़ी थी। रविवार को एसपी सिटी मान सिंह चौहान दातागंज पहुंचे और उन्होंने इस प्रकरण में इंस्पैक्टर को गांव पहुंचकर शांति व्यवस्था के निर्देश दिए। गांव में उनके आदेश पर पुलिस ने खुराफातियों को चेताया। कहा कि वे सभी सूचीबद्ध किए गए हैं जो इस विवाद को तूल दे रहे हैं।
कानूनन नहीं खिला सकते किसी को जबरन
गांव के जाटव समाज का नेतृत्व करने वाले रामवीर जाटव को पुलिस की इस चेतावनी से झटका लगा है कि कानूनन किसी को जबरन नहीं खिला सकते हो। विवाद में बंद हुए भंडारे को जब भी शुरू कराने की बात चली रामवीर जाटव आड़े आ गए। उनका कहना था कि छुआछूत के कारण बंद हुआ भंडारा चालू होगा तो गांव के सभी अन्य बिरादरी के लोग भी खाना उनके साथ ही खाएंगे। गांव के कुछ लोग तो इस बात को मान गए हैं लेकिन पूरा गांव वहां आकर भंडारा में जाटवों के साथ भोजन करे, इस पर सहमत नहीं हुआ। रामवीर की जिद पर पुलिस के तेबर तीखे हैं। पुलिस ने छुआछूत को गैर कानूनी तो माना है लेकिन यह भी चेतावनी दी है कि कोई किसी को जबरन खाना नहीं खिलाया जा सकता है। रामवीर पुलिस पहुंची तो गांव में नहीं थे। उनसे संपर्क करने का प्रयास भी किया गया लेकिन संपर्क भी नहीं हो सका।
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