बिना लाइसेंस लिए बेच रहे आतिशबाजी

Badaun Updated Thu, 24 Oct 2013 05:44 AM IST
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बदायूं। दिवाली आने से पहले जिले भर में पटाखा कारोबारी सक्रिय हो गए हैं। भले ही प्रभारी अधिकारी आयुध की ओर से अब तक पटाखा कारोबार के लिए नया लाइसेंस जारी न किया गया हो लेकिन शहर में आतिशबाजी का स्टॉक होने लगा है। चौराहों और गलियों में पटाखों की दुकानें भी सजने लगी हैं। पटाखा बिक्री के लिए विशेष लाइसेंस हासिल करने के लिए आयुध विभाग में अब तक कोई आवेदन नहीं आया है। बावजूद इसके शहर में आतिशबाजी के स्टॉक और जगह-जगह सज रही पटाखों की दुकानों पर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर नहीं है। हालांकि शहर में 15-15 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ क्षमता के तीन आतिशबाज पुराने लाइसेंसधारी हैं लेकिन जगह-जगह, गली-मोहल्लों में सजी पटाखों की दुकानों पर इससे कहीं ज्यादा स्टॉक है।
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गांव-देहात को भी शुरू हुई सप्लाई
दिवाली से पहले पटाखों और आतिशबाजी की सप्लाई गांव-देहात के बाजारों के लिए भी शुरू हो गई है। दिवाली का मुख्य पर्व तीन नवंबर को है। ऐसे में इसमें सिर्फ दस दिन शेष बजे हैं। पटाखा कारोबार साल में एक बार ही जोर पकड़ता है तो इससे जुड़े कारोबारी मुनाफा कमाने की नीयत से ही डग्गामार वाहनों के जरिए चोरी-छिपे अभी से गांव देहात के लिए आतिशबाजी की सप्लाई कर रहे हैं।
विस्फोटों में जा चुकी हैं कई की जानें
नाजायज आतिशबाजी के भंडार में आग की वजह से हुए हालिया हादसों ने आधा दर्जन लोगों की जान जा चुकी है वहीं कई घायल भी हुए हैं। इसके बावजूद प्रशासन अवैध आतिशबाजी के कारोबार पर अंकुश नहीं लगा सका है। पिछले साल मोहल्ला कबूपुरा में आतिशबाज असीमबेग के घर हुए धमाके में असीम समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा अलापुर में श्यामलाल की दुकान में आतिशबाजी में विस्फोट से श्यामलाल समेत तीन की मौत हो गई थी।
तीन दिन के लिए मिलता है लाइसेंस
दिवाली पर पटाखों की बिक्री के लिए तीन दिन का विशेष लाइसेंस प्रभारी अधिकारी आयुध की ओर से जारी किया जाता है। इसके लिए एक प्रक्रिया है, चालान और आवेदन जमा होने के बाद संबंधित थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की ओर से जांच कर संस्तुति की जाती है। इसके बाद लाइसेंस जारी होता है। नियमानुसार पटाखों की दुकानें घनी आबादी में नहीं लगाई जा सकतीं। हालांकि दिवाली में सिर्फ दस दिन शेष हैं लेकिन अब तक आयुध विभाग में लाइसेंस के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है।
आतिशबाजी और पटाखों का स्टॉक करना गैरकानूनी है। बिना लाइसेंस पटाखों की बिक्री करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। पटाखा कारोबारियों के लिए जरूरी है कि वह विशेष लाइसेंस प्राप्त कर लें। -निधि श्रीवास्तव, सिटी मजिस्ट्रेट/प्रभारी अधिकारी आयुधबिना लाइसेंस लिए बेच रहे आतिशबाजी
शहर में होने लगा आतिशबाजी का स्टॉक
बदायूं। दिवाली आने से पहले जिले भर में पटाखा कारोबारी सक्रिय हो गए हैं। भले ही प्रभारी अधिकारी आयुध की ओर से अब तक पटाखा कारोबार के लिए नया लाइसेंस जारी न किया गया हो लेकिन शहर में आतिशबाजी का स्टॉक होने लगा है। चौराहों और गलियों में पटाखों की दुकानें भी सजने लगी हैं। पटाखा बिक्री के लिए विशेष लाइसेंस हासिल करने के लिए आयुध विभाग में अब तक कोई आवेदन नहीं आया है। बावजूद इसके शहर में आतिशबाजी के स्टॉक और जगह-जगह सज रही पटाखों की दुकानों पर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर नहीं है। हालांकि शहर में 15-15 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ क्षमता के तीन आतिशबाज पुराने लाइसेंसधारी हैं लेकिन जगह-जगह, गली-मोहल्लों में सजी पटाखों की दुकानों पर इससे कहीं ज्यादा स्टॉक है।

गांव-देहात को भी शुरू हुई सप्लाई
दिवाली से पहले पटाखों और आतिशबाजी की सप्लाई गांव-देहात के बाजारों के लिए भी शुरू हो गई है। दिवाली का मुख्य पर्व तीन नवंबर को है। ऐसे में इसमें सिर्फ दस दिन शेष बजे हैं। पटाखा कारोबार साल में एक बार ही जोर पकड़ता है तो इससे जुड़े कारोबारी मुनाफा कमाने की नीयत से ही डग्गामार वाहनों के जरिए चोरी-छिपे अभी से गांव देहात के लिए आतिशबाजी की सप्लाई कर रहे हैं।
विस्फोटों में जा चुकी हैं कई की जानें
नाजायज आतिशबाजी के भंडार में आग की वजह से हुए हालिया हादसों ने आधा दर्जन लोगों की जान जा चुकी है वहीं कई घायल भी हुए हैं। इसके बावजूद प्रशासन अवैध आतिशबाजी के कारोबार पर अंकुश नहीं लगा सका है। पिछले साल मोहल्ला कबूपुरा में आतिशबाज असीमबेग के घर हुए धमाके में असीम समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा अलापुर में श्यामलाल की दुकान में आतिशबाजी में विस्फोट से श्यामलाल समेत तीन की मौत हो गई थी।
तीन दिन के लिए मिलता है लाइसेंस
दिवाली पर पटाखों की बिक्री के लिए तीन दिन का विशेष लाइसेंस प्रभारी अधिकारी आयुध की ओर से जारी किया जाता है। इसके लिए एक प्रक्रिया है, चालान और आवेदन जमा होने के बाद संबंधित थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की ओर से जांच कर संस्तुति की जाती है। इसके बाद लाइसेंस जारी होता है। नियमानुसार पटाखों की दुकानें घनी आबादी में नहीं लगाई जा सकतीं। हालांकि दिवाली में सिर्फ दस दिन शेष हैं लेकिन अब तक आयुध विभाग में लाइसेंस के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है।
आतिशबाजी और पटाखों का स्टॉक करना गैरकानूनी है। बिना लाइसेंस पटाखों की बिक्री करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। पटाखा कारोबारियों के लिए जरूरी है कि वह विशेष लाइसेंस प्राप्त कर लें। -निधि श्रीवास्तव, सिटी मजिस्ट्रेट/प्रभारी अधिकारी आयुध
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