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...अपने ही बुने जाल में फंसे लेखाधिकारी

Badaun Updated Thu, 08 Aug 2013 05:36 AM IST
जांच कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी डीएम को
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ठेका रिन्यूवल पर लगाई आपत्ति गलत पाई
बदायूं। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूलों की बालिकाओं को खाद्यान्न न मिलने के बाद उत्पन्न विवाद में सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी (एएओ) राजीव वार्ष्णेय फंस गए हैं। जांच कमेटी ने पाया है कि एएओ ने नियम विरुद्ध ठेका रिन्यूवल करने का जो आरोप लगाया था वह गलत है। लिहाजा, जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। वहीं मामले में फंसे लेखाधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक को भेजे जाने की तैयारी चल रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद से सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों में खलबली मची है।
यहां जिक्र कर दें कि जिले में 18 कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल हैं जिनमें सौ-सौ बालिकाएं पढ़ती हैं। बालिकाओं को भोजन समेत सभी जरुरी सुविधाएं स्कूल में दी जाती हैं। नवीन शैक्षिक सत्र शुरु होने के बाद इन स्कूलों को मात्र 15 दिन का खाद्यान्न ठेकेदार द्वारा भेजा गया था। बीते बृहस्पतिवार को खाद्यान्न न होने पर सभी स्कूलों की बालिकाओं को उनके घर भेज दिया गया था। तब अभिभावकों में भी खलबली मच गई थी। साथ ही विभागीय अधिकारी असमंजस की स्थिति में आ गए थे। स्कूलों को खाद्यान्न भेजने वाले ठेकेदार जोगेंद्र सिंह ने बीएसए समेत प्रशासनिक आला अफसरों को जो शिकायत की थी उससे सभी के कान खड़े हो गए। आरोप लगाया था कि एसएसए के सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी राजीव वार्ष्णेय ने उनका 25 लाख का भुगतान बेवजह रोक दिया है। जिसकी वजह से खाद्यान्न भी बंद कर दिया गया। ठेकेदार ने श्री वार्ष्णेय पर पांच प्रतिशत कमीशन मांगने का भी आरोप लगाया था।
बालिकाओं को स्कूल से उनके घर भेज दिए जाने का मामला कमिश्नर तक पहुंच गया था। कमिश्नर ने लेखाधिकारी के खिलाफ जांच कराने के साथ ही ठेकेदार का बकाए का पेमेंट कराने के निर्देश दिए। डीएम सीपी त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच को तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। इसमें कोषाधिकारी ब्रजेश कुमार, डीआईओएस सुशीला अग्रवाल और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को शामिल किया गया था। तीनों अधिकारियों को आरोपों की जांच जल्द ही देने के निर्देश दिए थे।
इधर, जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट बुधवार को डीएम को सौंप दी है। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि एएओ राजीव वार्ष्णेय ने नियम विरुद्ध ठेका रिन्यूवल की आपत्ति लगाई थी। जांच कमेटी का कहना है कि शासनादेश में स्पष्ट है यदि ठेकेदार का कार्य संतोषजनक है तो ठेका रिन्यू किया जा सकता है। लिहाजा, एएओ की इस आपत्ति में दम नहीं थी। वहीं जांच रिपोर्ट के बाद मामले में फंसे एएओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक को भेजे जाने की तैयारी चल रही है। चर्चा है कि एएओ की मुश्किलें और बढ़ सकतीं हैं।
इंसेट-
अपने बचाव में जुटे हैं एएओ
विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए जांच में फंसे सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी राजीव वार्ष्णेय जुट गए हैं। सूत्रों ने बताया कि वह सभी तथ्य जुटाने में लगे हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट आने से लग रहा है कि उनकी दिक्कतें कम होेने वाली नहीं हैं।
इंसेट-
जांच रिपोर्ट पढ़ने के बाद निकला निष्कर्ष
एसएसए के एएओ राजीव वार्ष्णेय के खिलाफ जांच कराई गई थी। रिपोर्ट आ गई है। हालांकि अभी मैंने रिपोर्ट पढ़ी नहीं है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद निष्कर्ष निकाला जाएगा। सीपी त्रिपाठी, डीएम
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जांच पूरी हो गई है। जिन बिदुंओं पर जांच की गई थी उसमें आरोप सही पाए गए हैं। ठेकेदार के रिन्यूवल के मामले में एएओ की आपत्ति निराधार थी। जांच रिपोर्ट को परियोजना निदेशक को भेजा जाएगा। फिलहाल एसएसए का चार्ज एओ ब्रजेश कुमार पर है।-कृपाशंकर वर्मा, बीएसए

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