अपने माननीयों के दामन भी हैं दागदार

विज्ञापन
Badaun Published by: Updated Fri, 12 Jul 2013 05:33 AM IST

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

कई विधायकों, पूर्व मंत्रियों पर दर्ज हैं मुकदमे
विज्ञापन

कई ने तो चुनाव आयोग से भी छिपा ली हकीकत
सुप्रीम कोर्ट के फरमान से बढ़ीं नेताजी की धड़कनें
बदायूं। दो साल की सजा वाले लोगों को एमपी, एमएलए का चुनाव लड़ने से रोकने और उनकी सदस्यता खत्म करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राजनीति में शुचिता का वातावरण बनने की उम्मीद बढ़ी है। आमजन को यह फैसला भाया है तो कई जनप्रतिनिधि और चुनावी सब्जबाग देख रहे दबंग नेताओं के सपनों पर यह कुठाराघात जैसी स्थिति है। जिले की बात करें तो तमाम नेता ऐसे हैं जिनके खिलाफ संगीन मुकदमे दर्ज हैं। कुछ ने इनमें एफआर लगवा ली तो कुछ ने सत्ता का लाभ पाते हुए इन्हें खत्म करा लिया। तमाम मामले आज भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। इन नेताओं का भविष्य अब इसी बात पर निर्भर करेगा कि आगे वह कितना सेफ रह पाते हैं। ऐसे ही कई नेताओं से जुड़े रिकार्ड अमर उजाला टीम ने तलाश किए। ज्यादातर का आधार खुद नेताओं की ओर से चुनाव के दौरान दाखिल शपथपत्र रहे पर इसमें भी घालमेल देखने को मिला। कई नेताओं ने शपथपत्र में उन मुकदमों का जिक्र नहीं किया जो उनके खिलाफ कभी दर्ज हुए थे। आप भी जानिए अपने माननीयों के खिलाफ मुकदमों की स्थिति।

1. योगेंद्र सागर (पूर्व विधायक बिल्सी)
चर्चित ज्योति रेप कांड में पूर्व विधायक सागर को अदालत भगोड़ा घोषित कर चुकी है। वह लंबे समय से कानून की नजर से फरार हैं। उनके खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, धमकाने और अन्य गंभीर आरोपों का मुकदमा चल रहा है। इसमें फिलहाल सजा नहीं हुई है।


2. मुसर्रत अली उर्फ हाजी बिट्टन (विधायक बिल्सी)
बिट्टन के खिलाफ शहर के सिविल लाइंस थाने में आर्म्स एक्ट के दो मुकदमे दर्ज रहे हैं, जिनकी सुनवाई यहां सीजेएम कोर्ट में चल रही थी। उनके खिलाफ इस्लामनगर थाने में भी एक रिपोर्ट दर्ज हुई थी, जो बाद में खारिज हो गई।

3. शहर विधायक
मौजूदा शहर विधायक के खिलाफ विधायक बनने के बाद भी सदर कोतवाली में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। चुनाव से पहले उन्होंने आयोग के समक्ष जो हलफनामा दाखिल किया उसी में सदर कोतवाली में आठ मुकदमे दर्ज होना बेवाकी से स्वीकारा गया है। विधायक ने इसमें स्वीकार किया कि इनमें से चार मुकदमों में वह दोषमुक्त हो चुके हैं। दो में एफआर लग गई है। एक विवेचना में झूठा पाया गया।

4. रामसेवक सिंह
कभी ट्रेन में हुए कत्लेआम में नाम उछलने से चर्चित हुए पूर्व बिनावर विधायक और शहर सीट से प्रत्याशी रहे रामसेवक सिंह पटेल ने हालिया हलफनामे में अपने ऊपर किसी मुकदमे से इंकार किया है।

5. मुस्लिम खां (पूर्व विधायक उसहैत)
इस बार शेखूपुर विधानसभा से चुनाव लड़े उसहैत के पूर्व विधायक मुस्लिम खां के खिलाफ उनके गृहनगर ककराला कस्बे से संबंधित अलापुर थाने में कई मुकदमे कायम रह चुके हैं। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास जैसे मामले भी शामिल थे। हालांकि इनमें से अधिकांश में वह दोषमुक्त हो चुके हैं। कुछ में एफआर तो कुछ निरस्त हो चुके हैं।


6. भगवान सिंह शाक्य (पूर्व मंत्री)
पूर्व मंत्री भगवान सिंह के खिलाफ समय-समय पर विभिन्न मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से एक पिछले विधानसभा चुनाव से ऐन पहले सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुआ। इसमें उन्हें कुख्यात आरोपी हरीश पहाड़िया को घर में संरक्षण देने का आरोपी बनाया गया था। इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल की गई है, जो भविष्य में उनकी परेशानी बढ़ा सकती है। अलापुर थाने में उनके खिलाफ एक मुकदमा काफी पहले से विचाराधीन है। ताज्जुब की बात यह है कि चुनावी हलफनामे में पूर्व मंत्री ने इस तरह के किसी मुकदमे का जिक्र नहीं किया।

7. आशीष यादव (शेखूपुर विधायक)
सपा जिलाध्यक्ष के पुत्र और शेखूपुर विधायक के खिलाफ पांच मुकदमों का जिक्र खुद उनके चुनावी हलफनामे में है। उस वक्त विधायक के खिलाफ एक मुकदमा विशेष न्यायाधीश, डकैती और चार मुकदमे सीजेएम बदायूं कोर्ट में चल रहे थे।


8. विमलकृष्ण अग्रवाल (पूर्व मंत्री)
बदायूं विधानसभा से चुनाव जीतकर सपा सरकार में राज्यमंत्री रह चुके विमलकृष्ण अग्रवाल ने हलफनामे में तीन मुकदमों का जिक्र किया था। इनमें से दो मुकदमे बदायूं कोतवाली और एक उझानी कोतवाली में दर्ज थे। हालांकि बदायूं में दर्ज मुकदमे चुनावी सीजन से जुड़े सामान्य मामले थे।

9. भूपेंद्र सिंह कुर्मी (पूर्व मंत्री)
पहले मंत्री रह चुके भूपेंद्र सिंह के खिलाफ एक मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का एक मुकदमा चुनाव के वक्त भी कायम था। यह वाद संयुक्त मजिस्ट्रेट सेकेंड के कोर्ट में चल रहा था। इसका जिक्र पूर्व मंत्री के चुनावी हलफनामे में भी था।

10. डीपी यादव (पूर्व मंत्री)
जिले की सहसवान विधानसभा से विधायक रह चुके पूर्व मंत्री डीपी यादव के खिलाफ साहिबाबाद थाने में हत्या और अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज था। इसमें एफआर लगी पर सीजेएम ने दोबारा विवेेचना के आदेश कर दिए। इसे खुद डीपी ने अपने चुनावी हलफनामे में स्वीकार किया था। बाहुबली की श्रेणी में आने वाले इन पूर्व जनप्रतिनिधि के खिलाफ पांच मुकदमे गुन्नौर क्षेत्र में चुनाव के दौरान लिखवाए गए थे। इनके खिलाफ रासुका भी लगाई गई। डीपी बदायूं जेल में भी बंद रहे थे। हालांकि कोर्ट से डीपी को राहत मिली। कुछ मुकदमे खारिज कर रासुका हटाई गई। चर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड में गवाह को धमकाने का भी मुकदमा उनके खिलाफ दर्ज हुआ था।


इन्होंने दिखाया खुद को क्लीनचिट
सहसवान विधायक ओमकार सिंह, गुन्नौर निवासी पूर्व मंत्री अजीत कुमार राजू ने खुद को चुनावी हलफनामे में क्लीनचिट वाला दिखाया है। हालांकि गुन्नौर के विधायक रामखिलाड़ी के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज रह चुके हैं, जिसका जिक्र चुनावी हलफनामों में भी है।


पुलिस खुद करती है सरेंडर
आमतौर पर नेताओं और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ चुनावी सीजन में तमाम मुकदमे दर्ज होते हैं। कभी तो पुलिस खुद दिलचस्पी लेकर सामान्य शिकायत में ही उनके खिलाफ मामले दर्ज कर लेती है तो कभी जनाक्रोेश को दबाने की वजह से नेताओं के खिलाफ संगीन मुकदमे कायम कर दिए जाते हैं। हालांकि बाद में पुलिस का रवैया बदल जाता है। सत्ता परिवर्तन के साथ ही जब नेता का कद बढ़ता है तो मुकदमे भी उतनी ही तेजी से खत्म करने का सिलसिला शुरू हो जाता है जितनी तेजी से वह दर्ज हुए थे।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X