बिना शिक्षक के तो बच्चे नहीं सीख पाएंगे ककहरा

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Badaun Published by: Updated Thu, 11 Jul 2013 05:32 AM IST

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जिले के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों का टोटा
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सैंकड़ों स्कूल सिर्फ शिक्षामित्रों के सहारे
बदायूं। जिले में देश के भावी कर्णधारों को बिना शिक्षक के ककहरा सिखाने की नाकाम कोशिशें हो रही हैं। दरअसल यहां बेसिक शिक्षा भगवान भरोसे चल रही है। बेसिक शिक्षा विभाग एक ओर तो कान्वेंट स्कूलों से मुकाबले की बात कर रहा है वहीं शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां से बड़ी संख्या में शिक्षकों का दूसरे जिलों में तबादला होने से स्कूलों में छात्र-शिक्षक का मानक ही गड़बड़ा गया है। कई स्कूलों में तो तालाबंदी की नौबत आ गई है। इस स्थिति के चलते बेसिक स्कूलों में शिक्षण कार्य भी सुचारु तरीके से नहीं चल पा रहा है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत बेसिक स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए हर साल भारी रकम मिलती है। कई साल से यह अभियान चल रहा है, लेकिन शिक्षा में आज तक कोई खास गुणात्मक सुधार नहीं आ सका है। इसकी मुख्य वजह छात्रों की संख्या के अनुरूप स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती न हो पाना है। जिले में शिक्षकों की पहले से ही बेहद कमी है। ऊपर से शासन के बाहरी जिलों के शिक्षकों की उनके गृह जनपद में तैनाती के आदेश से स्थिति और बिगड़ गई है। पिछले साल करीब 400 सौ शिक्षकों के यहां से दूसरे जिलों को तबादले हो गए थे। इस साल भी करीब इतने ही शिक्षक अपने गृह जनपद में जाने के लिए तैयार हैं।

यहां बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा अधिनियम के तहत बेसिक स्कूलों में मानक के अनुसार प्रति 35 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए मगर इस मानक का एक भी स्कूल में पालन नहीं हो रहा है। जिले में 1822 प्राइमरी और 647 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। इन स्कूलों में दो लाख 90 हजार से अधिक बच्चे नामांकित हैं। यदि मानक के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती हो तो जिले को कम से कम आठ हजार शिक्षक चाहिए। जबकि यहां सिर्फ तीन हजार शिक्षक ही हैं। करीब पांच हजार शिक्षकों की कमी है, लेकिन विभाग का कहना है कि जिले में करीब तीन हजार शिक्षामित्र हैं। लिहाजा दो हजार शिक्षकों की ही कमी है। शिक्षकों के अभाव में जिले के हर ब्लॉक में कई ऐसे स्कूल हैं जिनमें ताले पड़े हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन स्कूलों में अनुदेशकों से काम लिया जा रहा है।

वर्जन-
यह बात सही है कि जिले में शिक्षकों की भारी कमी है, लेकिन ऐसा नहीं है कि स्कूल बंद हों। इसके लिए नवीन शैक्षिक सत्र में व्यवस्था की जा रही है। जो भी स्कूल एकल हैं, वहां और शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। वैसे-उच्च प्राथमिक स्कूलों में अनुदेशकों की नियुक्ति हो गई है। इससे इन स्कूलों में अब शिक्षकों की कमी नहीं कहीं जा सकती। नये शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। उनकी नियुक्ति होते ही व्यवस्था पूरी हो जाएगी। कृपाशंकर वर्मा, बीएसए
इंसेट-
आंकड़ों में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति
प्राइमरी स्कूलों की संख्या-1822
उच्च प्राइमरी स्कूलों की संख्या-647
शिक्षकों की संख्या करीब 3100
194 स्कूल शिक्षक विहीन
750 स्कूल हैं एकल
शिक्षामित्रों की संख्या करीब तीन हजार
अनुदेशकों की संख्या 627

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