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गेहूं की बल्ले-बल्ले, आलू पर संकट के बादल

Badaun Updated Sun, 24 Feb 2013 05:30 AM IST
उझानी। जनवरी से अब तक तीसरी बार हुई बेमौसम से कहीं खुशी-कहीं गम के हालात हैं। हालांकि अभी ऐसी ओलावृष्टि की सूचना नहीं है जो ज्यादा नुकसान की वजह बने लेकिन बरसात के साथ ही तेज हवा के कारण किसानों के चेहरों पर शिकन नजर आने लगी है। पकने को तैयार आलू की फसल पर जहां संकट के बादल मंडरा रहे हैं वहीं गेहूं उत्पादकों की बल्ले-बल्ले हो रही है।
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शनिवार तड़के शुरू हुई बरसात रुक-रुक कर शाम तक होती रही। बीच-बीच में झमाझम बारिश भी हुई। इस मौसम में पहले 18 जनवरी को पानी पड़ा था। इसके बाद फरवरी के पहले सप्ताह और अब जो बरसात हुई है, वह खासकर गेहूं के लिए मुफीद साबित हुई है। क्योकि गेहूं का ही इस मौसम की फसलों में सर्वाधिक रकवा में है। आलू का रकवा गेहूं से काफी कम है। जबकि आलू की फसल पकने को तैयार है। मेंथा की रोपाई भी हो चुकी है। मेंथा का शुरुआत से ही अधिक नमी की जरूरत रहती है। कमोवेश ऐसी ही सिंचाई गन्ना को चाहिए। यह बरसात हालांकि अधिकतर फसलों की आवश्यकता की पूर्ति करेगी लेकिन तेज हवा के झोंके बाली वाले गेहूं को घातक साबित होंगे।
-इन्हें फायदेमंद है बरसात-
0 गन्ना की बुआई हो चुकी है, सो बरसात का पानी फसल को रामवाण साबित होगा।
0 मेंथा की रोपाई जनवरी महीना में शुरू हो चुकी है। बरसात से एक सिंचाई का फायदा हो गया।
0 लहटा के बाद माहू का प्रकोप गेहूं पर नजर आने लगता है, बरसात के साथ ही माहू भी छिटक कर गिर गई।
0 आम समेत बागवानी के पौधों की पत्तियों पर छाई धूल पर बरसात से साफ हुई, हरियाली लौटने लगेगी।
-इन्हें बरसात से है नुकसान-
0 लहटा पिछले दिनों ही पक गया था। बरसात हो जाने से खेतों में कटे पड़े लहटा के दानों के सड़ने की आशंका बनी हुई है।
0 आलू भी खुदाई को तैयार है। पकी फसल का डंठल काट जा चुका है। फसल वाले खेत में भरा बरसाती आलू को सड़ा देगा।
0 मटर की फसल होली के आसपास पक जाती है। इन दिनों फली में दाना आ चुका है, सो खेत बरसात का पानी ठहरा तो फली फफूंदी का शिकार बनेगी।
-वैज्ञानिक राय-
फसल में भरे पानी को निकाल दें बाहर
फोटो-23 बीडीएन-
क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र के इंचार्ज डा. एसबी सिंह ने बताया कि बरसात से नुकसान के मुकाबले फायदा अधिक है लेकिन किसानों को किसी मुगालते में नहीं रहना चाहिए। आलू, मटर, गोभी की फसल को नुकसान से बचाने के लिए खेतों में भरा बरसाती पानी बाहर निकालने की व्यवस्था करनी होगी। लहटा को भी मौसम साफ होते ही किसान फैला दें। हवा पास होते रहने से दाना खराब होने से बच जाएगा।
गेहूं को उचित मात्रा में दें उर्वरक
फोटो-23 बीडीएन-
कृषि वैज्ञानिक शस्य अर्जुन सिंह कहते हैं कि अगेती गेहूं की फसल में बलियां निकल चुकी हैं। उन्हें यूरिया की कुछ हद तक आवश्यकता है लेकिन उसे आवश्यकता से अधिक नहीं लगाएं। क्योकि बरसात के पानी में नत्रजन की मात्रा अधिक होती है। पिछेती गेहूं को तेज हवा से कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन दोनों अगेती और पिछेती गेहूं की फसल को एक और सिंचाई का फायदा हो गया है। पके आलू की खुदाई भी धूप निकलते शुरू कर दी जाए। आने वाले दिन भी आलू के भंडारण के हैं।
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