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सांसों की डोर ने छोड़ा साथी का साथ

Badaun Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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बदायूं। व्यंग्य वाणों से राजनीति और व्यवस्था पर चोट करने वाले वरिष्ठ कवि डॉ. मोहदत्त साथी अचानक चल बसे। फरीदाबाद में बड़े पुत्र के पास इलाज करा रहे साथी की सांसों ने शुक्रवार रात उनका साथ छोड़ दिया। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर बदायूं आवास पर लाया गया। काव्य जगत से जुड़े उनके सहयोगी और कनिष्ठ साथियों ने नम आंखों से उनके अंतिम दर्शन किए। शनिवार को कछला घाट पर उनकी अंत्येष्टि कर दी गई।
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वयोवृद्ध कवि डॉ. साथी (80) एनएमएसएन दास पीजी कॉलेज में लंबे समय तक अंग्रेजी विभाग के रीडर रहे। कई साल पहले वह रिटायर हो गए थे। इसके बाद से आवास विकास ए ब्लाक स्थित अपने घर पर ही रह रहे थे। वह लंबे समय से अस्थमा से पीड़ित थे। करीब एक महीना पहले उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई। तब उनके बड़े बेटे आलोक उन्हेें फरीदाबाद बुला ले गए थे। इसके बाद से साथी का वहां के सर्वोदय अस्पताल में इलाज चल रहा था। शुक्रवार रात करीब आठ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। इस दौरान उनकी पत्नी मुन्नी शर्मा, पुत्र आलोक और अन्य परिजन मौजूद थे। उन्होंने इसकी सूचना बदायूं में परिचितों को दी। इसके बाद यह लोग शव लेकर रात के अंतिम पहर में बदायूं आ गए।

शनिवार को सुबह तड़के से ही उनके आवास पर परिजनों और परिचितों का आना-जाना शुरू हो गया। इसके बाद शव को कछला ले जाया गया। वहीं गंगाघाट पर उनकी अंत्येष्टि कर दी गई। इस अवसर पर जिले के अनेक कवि और साहित्यकार मौजूद रहे। डॉ. उर्मिलेश शंखधार, डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी और काका देवेश के बाद अब डॉ. मोहदत्त साथी के जाने से जिले में साहित्य के बुजुर्ग पुरोधाओं की कमी खलने वाली है। उनका गजल संग्रह नीड़ के जंगल और कविता संग्रह काल पत्रक काफी मशहूर हुए।

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