गरीबों के अरमानों पर डूडा ने पानी फेरा

Badaun Updated Tue, 29 Jan 2013 05:30 AM IST
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उझानी। गरीबों को सस्ते में घर मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने इंटीग्रेटिड हाउसिंग एवं स्लम डेवलेपमेंट योजना के तहत 128 घर बनाने का फैसला किया था। धन भी पूरा दे दिया लेकिन कार्यदायी महकमा डूडा ने निर्माण की गति को रफ्तार नहीं दी। निर्माण पहले चरण में ही लेट लतीफ रहा। निर्धारित समय में वह न तो सामुदायिक भवन का निर्माण पूरा करा पाया और न ही दूसरे चरण के लिए बाकी बचे घर बना सका। इस लापरवाही के चलते डूडा को 32 आवास सरेंडर करने पड़ गए।
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संजरपुर रोड़ पर इस योजना के तहत वर्ष-2007 में आवासीय कालोनी का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। इंट्रीगेडिट हाउसिंग एवं स्लम डेवलेपमेंट योजना के लिए केंद्र सरकार ने 128.63 लाख रुपये अवमुक्त किए थे। जिला नगरीय अभिकरण विभाग (डूडा) से प्रस्तावित 128 घर दो चरण में बनाने थे। पहले चरण में 64 आशियां बने। इन्हें आवंटित भी कर दिया गया।

दूसरे चरण में महकमा ने बाकी बचे 64 घर में से आधे मकान और सामुदायिक भवन बना दिए, लेकिन बाकी कार्य पूरा कराने के लिए महकमा ने यह कह कर हाथ खड़े कर दिए कि महंगाई कई गुना बढ़ गई है। अब, डूडा ने 32 आवास का निर्माण कार्य ही सरेंडर कर दिया है। बची हुई धनराशि भी केंद्र सरकार ने वापस ले ली है।
इंसेट-
तत्कालीन जेई की भूमिका पर उठे सवाल
जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी रविवार को संजरपुर रोड़ कालोनी का मौका मुआयना करने पहुंचे तो उन्हें निर्माण में खामियां मिली थीं। हालांकि वह डूडा के जेई के खिलाफ कार्रवाई का फरमान सुना चुके हैं, लेकिन पूरे मामले पर गौर करें तो जो आवास बने हैं, उनकी गुणवत्ता पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। तत्कालीन जेई मोहम्मद शफीक की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए अफसरों से शिकायतें की गई थीं लेकिन तब अफसरों ने गुणवत्ता की जांच कराने की जरूरत महसूस नहीं की। जानकारों की मानें तो अगर सही ढंग से जांच हो तो तत्कालीन जेई समेत जिम्मेदार अन्य अफसरों की गर्दन फंसने से इंकार नहीं किया जा सकता।
वर्जन
कॉलोनी का निर्माण जब शुरू हुआ था तब जेई दूसरे थे। मुझे तो यही नहीं पता कि किन कारणों से बाकी बचे घर महकमा को सरेंडर करने पड़े। रही बात, गुणवत्ता की तो मानक के दुरुपयोग का मामला भी तत्कालीन जेई के कार्यकाल का है। डीएम ने जो आदेश दिया है, अब काम उसी के अनुरूप होगा।- जियालाल, जेई डूडा।

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