पटवारी सुनते नहीं, अधिकारी मिलते नहीं

Badaun Updated Fri, 25 Jan 2013 05:32 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

बदायूं। ग्रामीणों को गांव में ही शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना जनसेवा केंद्र जिले में बेमतलब साबित हो रहे हैं। विभागों की उदासीनता के चलते महीनों से केंद्रों के आवेदन संबंधित तहसील केंद्रों पर लंबित पड़े हैं। केंद्रों से उद्यमियों का मोहभंग हो रहा है और नए केंद्र खुलने में भी दिक्कत पेश आ रही है।
विज्ञापन

शासन की मंशा के अनुरूप जिले में 284 जनसेवा केंद्र न्यायपंचायत स्तर पर स्थापित किए जाने हैं। जिले में इसका काम वयम टेक्नोलाजी लिमिटेड नाम की निजी संस्था को दिया गया है। संस्था ने 196 केंद्र स्थापित भी कर दिए हैं। इन केंद्रों से विभिन्न योजनाओं या प्रमाणपत्रों के लिए ग्रामीणों के आवेदन संबंधित तहसील के लोकवाणी केंद्रों को भेजे जाते हैं। नियमानुसार निश्चित समयावधि में प्रमाणपत्र ओके होकर केंद्रों पर उपलब्ध हो जाने चाहिए, पर सरकारी तंत्र की उदासीनता की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा।

इन हालात में तमाम उद्यमी अब संस्था से केंद्र सरेंडर करने की बात कह रहे हैं और खाली केंद्रों के लिए नए उद्यमी नहीं मिल रहे।

यह है काम की मौजूदा तस्वीर
जनसेवा केंद्रों के माध्यम से साठ दिन पहले दो जन्म प्रमाणपत्र आवेदन दिए गए थे। आज तक दोनों आवेदन पेंडिंग पड़े हैं। इसी तरह दो मृत्यु प्रमाणपत्रों के आवेदन भी पेंडिंग हैं। कुल 2399 निवास प्रमाण पत्र आवेदित किए गए थे। इनमें से 753 अंडरप्रोसेस चल रहे हैं और 70 पेंडिंग पड़े हैं। विधवा महिला की बेटी की शादी को अनुदान के लिए गया प्रमाणपत्र भी लंबित पड़ा है। विधवा पेंशन के 14 आवेदन भेजे गए। इनमें सात प्रक्रिया में और तो बाकी सात लंबित हैं। पारिवारिक लाभ योजना के सभी तीनों आवेदन और रोजगार पंजीकरण के सभी छह आवेदन लंबित हैं। वृृद्धावस्था पेंशन के तीन में से दो आवेदन लंबित हैं।

नहीं मिले बिल्सी तहसीलदार के हस्ताक्षर
बिल्सी क्षेत्र के तमाम ग्राम उद्यमियों के मुताबिक उनके प्रमाणपत्र तहसीलदार के डिजीटल साइन न आने की वजह से जारी नहीं हो पा रहे। उनकी फरियाद पर तहसीलदार कहते हैं कि डिजीटल सिग्नेचर लखनऊ में बन गए हैं, जाकर खुद ले आओ। उद्यमियों के मुताबिक सिग्नेचर मंगाना एक शासकीय कार्य है जिसे वह लोग नहीं करवा सकते। तहसीलदार के व्यवहार से ऐसे तमाम उद्यमी आहत हैं।

क्या कहते हैं संस्था के अधिकारी
दिल्ली से मानीटरिंग के लिए आए वयमटेक कंपनी के अधिकारी अजयपाल सिंह के मुताबिक ग्राम उद्यमियों की दिक्कतें अधिकारियों को समझनी चाहिए। जनता की शिकायत पर अधिकारी संस्था के खिलाफ कार्रवाई की बात तो करते हैं पर अपने कर्मचारियों की हीलाहवाली पर गौर नहीं करते। हमने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलकर समस्याएं बताई हैं। उनसे निस्तारण का आश्वासन भी मिला है।

क्या कहते हैं सीडीओ
जिले के मुख्य विकास अधिकारी सूर्यपाल गंगवार कहते हैं कि उनकी संस्था के अधिकारियों से बात हुई है। जनता को परेशानी के लिए संस्था भी काफी हद तक जिम्मेदार है। इसीलिए अपेक्षित परिणाम न मिलने की स्थिति में उसे ब्लैकलिस्टि करने की चेतावनी दी गई है। रही सरकारी कर्मचारियों की हठधर्मिता की बात तो उसके लिए संबंधित अधिकारी से शिकायत करनी चाहिए। हम भी जिलाधिकारी से बात करके इस पर रोक लगाने का प्रयास करेंगे। दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X