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भू और लकड़ी माफियाओं की भेंट चढ़ा पौराणिक वन

Badaun Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
दातागंज (बदायूं)। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का हडौरा का वन की सुंदरता और जमीन तो भूमाफियाओं और लकड़ी माफियाओं की भेंट चढ़ चुकी है। अब वन में रहने वाले बेजुबान जानवरों पर शिकारियों की टेढ़ी नजर है। वन में रहने वाले हिरन खरगोश और नीलगाय की गिनती उंगलियों में गिनने लायक रह गई है। डहरपुर-म्याऊं मार्ग पर हडौरा का वन है। महाभारत काल में यह हिडम्बा नामक राक्षसी का कार्य क्षेत्र था। अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इसी वन में छद्मवेश में अपना कुछ समय गुजारा। यहीं भीम ने हिडम्बा से गंधर्व विवाह किया था और यहीं घटोत्कच की उत्पत्ति हुई थी। कालांतर में हिडम्बा की जगह हडौरा ने ले ली । सड़क पड़ने से पहले यहां दिन में गुजरने से लोग कतराते थे, लेकिन वर्तमान में डहरपुर-म्याऊ मार्ग पर अन्य मार्गों की तरह यातायात चल रहा है। पूर्व में वन संपदा माफियाओं ने नष्ट कर दी, बाद में शासन ने यहां कीकर का वन लगवा दिया। लकड़ी माफियाओं ने कीकर की लकड़ी भी नहीं छोड़ी। अब हाल यह है कि 20-25 किमी. के दायरे में फैला वन सिकुड़कर 4-5 किमी. के दायरे में रह गई है। वन तोड़कर अधिकांश जमीन पर खेतीबाड़ी हो रही है। वन में जंगली गाय, नीलगाय, हिरन और खरगोशों के झुंड तीन-चार साल पहले उछलते-कूदते नजर आते थे। चार माह पूर्व विलुप्त प्राय: प्रजाति सल्लू सांप का जोड़ा यहां निकला था। इस वन पर शिकारियों की निगाह पड़ने से जानवरों की संख्या नगण्य हो गई। वन विभाग के अधिकारी भी संज्ञान में होने के बावजूद खामोशी धारण किए हुए हैं। लोगों का मानना है कि यही हाल रहा तो जल्द ही वन का बचा-खुचा अस्तित्व भी नष्ट हो जाएगा।
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