विदेशों में जाती है ककराला के अमरूदों की मिठास

Badaun Updated Mon, 17 Dec 2012 05:31 AM IST
अलापुर (बदायूं )। अमरूद उत्पादन के क्षेत्र में देश और प्रदेश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी ककराला की खास पहचान है। इन दिनों अमरूद की फसल तैयार है। यहां का अमरूद अब विदेशों तक सप्लाई किया जा रहा है। इस बार बारिश कम होने की वजह से उखटा रोग लग जाने से उत्पादन में करीब बीस फीसदी कमी का अनुमान है ।
ककराला के 90 फीसदी लोग अमरूद की बागवानी करते हैं, बागबानों के मुताबिक इस बार यहां प्रतिदिन करीब पचास-साठ लाख रुपये का करोबार हो रहा है। फलपट्टी घोषित होने के बाद भी यहां के किसानों को कोई लाभ नहीं मिलता नजर नहीं आ रहा है। जिससे सैकड़ों बीघा फसल उखटा रोग के कारण नष्ट हो रही है किसानों के लिए कभी अमरूद की फसल फायदे की सौदा हुआ करती थी, लेकिन इस बार फसल में उखटा रोग और बारिश कम होने के कारण करीब 20 प्रतिशत उत्पादन कम होने के आसार हैं । करीब 30 साल पूर्व से शुरू हुआ अमरूद की बागवानी का काम आज भी चरम पर है। सबसे महत्वपूर्ण बात इस फसल की यह है कि यह साल में दो बार होती है। अमरूद पेट की पाचन क्रिया के लिए काफी मुफीद होता है। इसकी एक फसल बरसात और दूसरी सर्दियों के दिनों में होती है। यहां के छोटे से लेकर बडे़ किसान के पास बड़ी मात्रा में अमरूद के बागान है। साथ ही क्षेत्र के तमाम महिला-पुरुषों को रोजगार भी मिलता है। इसका जूस तैयार कर पैकिंग विदेशों को जाती हैं ।

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