बाबा ध्यानपुरी ने बताई ककोड़ा देवी की महिमा

Badaun Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
कादरचौक। ककोड़ा वन देवी मां की महिला बाबा ध्यानपुरी ने ही नबाव अबदुल्ला क ो बताई थी। बाबा ध्यानपुरी की समाधि मंदिर से एक किमी दूर पूर्व दिशा की ओर जंगल में बनी है। बाबा ध्यानपुरी के पास नबाव अब्दुल्ला पहुंचे। वह कुष्ट रोग से पीड़ित थे। तब गंगा बाबा की कुटिया के निकट ही बहती थी। बाबा ने बताया कि जंगल में वट वृक्ष केे पास कुआं है। वहीं देवी का प्राकट्य हुआ।
बाबा के बताए अनुसार नबाव ने देवी की सेवा कर गंगा स्नान किया और ककोड़ा घास का लेप किया। जिससे उनका कुष्ट रोग ठीक हो गया। तब से नबाव ने पूर्णिमा के दिन गंगा घाट पर मेला लगवाना शुरू कर दिया। बाद में अंग्रेजों ने भी यहां मेला लगवाकर देवी की महिमा को बढ़ाया। आजादी के बाद जिला पंचायत ने मेले को लगवाने का जिम्मा लिया। तब से जिला पंचायत मेला लगवा रही है। वहीं एक किदवंति यह भी है कि कालांतर में रुहेलों ने देवी पर आक्रमण कर दिया। जिससे देवी का सिर खंडित हो गया। इसके बाद रुहेलों की सेना का नाश होने लगा। तब रुहेलों ने अपने अस्त्रों सहित देवी के सामने समर्पण कर दिया। ये शस्त्र और धन मंदिर के नीचे बने कुआं में अभी भी रखे हैं।

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