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नरसिंह ने किया हिरण्यकश्यप का वध

Badaun Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। गांधी ग्राउंड में चल रही रामलीला में रविवार को कलाकारों ने भक्त प्रह्लाद की कथा का मंचन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। इसके अलावा कलाकारों ने सुदामा और कृष्ण की झांकी सजाई। कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए।
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रविवार को सबसे पहले वेगू सराय बिहार से आए कलाकारों ने सुदामा और भगवान कृष्ण की झांकी सजाई। फिर कलाकारों ने भक्त हिरण्यकश्यप की कथा का मंचन किया। राजा हिरण्यकश्यप इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त करने के बाद स्वयं को ईश्वर मानने लगता है। राज्य में हत्याचार बढ़ जाता है। जो भी उसे ईश्वर मानने से इंकार करता है उसका वध कर दिया जाता है। लेकिन हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त है। हिरण्यकश्यप उसे कई बार स्वयं को ईश्वर मानने के लिए विवश करता है लेकिन बालक प्रहलाद प्रभु की भक्ति में लीन है उस पर पिता के समझाने और धमकाने का असर नहीं पड़ता। हारकर वह प्रहलाद को मारने की योजना बनाता है और हर बार प्रभु अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करते हैं। इसके बाद हिरण्यकश्यप की बहन होलिका भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अगिभन में भस्म करने के लिए बैठती है, लेकिन प्रभु की कृपा से भक्त प्रह्लाद तो बच जाते हैं और होलिका अगिभन में भस्म हो जाती है। इसके बाद हिरण्यकश्यप भक्त प्रह्लाद को गर्म खंभे पर चिपकाकर मारने की योजना बनाता है। तब प्रभु नरसिंह अवतार लेकर प्रकट होते हैं और हिरण्यकश्यप को अपनी जांघ पर रखकर उसका वध कर देते हैं। इस तरह प्रभु अपने भक्तों की हर विपत्ति में रक्षा करते हैं। कथा के दौरान कलाकारों ने हास्य और रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए।



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