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स्टेशन नहीं यहां तो मुसाफिरों की सुरक्षा से भी खिलवाड़

Badaun Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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दबतोरी। यह सही है कि रेलवे स्टेशन लूट लिए जाने की घटना जिले में पहली बार हुई है लेकिन इसकी नींव खुद रेलवे के अधिकारियों की लापरवाही ने रखी थी। बरेली जीआरपी की हद में आने वाले दबतरा स्टेशन की सुरक्षा के नाम पर वहां के अधिकारियों ने महज खिलवाड़ से ज्यादा कुछ नहीं किया है। न तो स्टेशन पर सिपाही तैनात किए गए हैं और न ही कैश पहुंचाने की कोई व्यवस्था है। ऐसे में यहां स्टेशन ही नहीं बल्कि मुसाफिरों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो रहा है।
स्टेशन मास्टर के. सिंह के मुताबिक हर रोज स्टेशन से लगभग तीस हजार रुपये के टिकट बिक जाते हैं। यह रकम वह मुरादाबाद कंट्रोल रूम भेज देते हैं। रकम रखने के लिए सरकारी थैला वहीं से आता है। अक्सर थैला तीन से चार दिन बाद आता है। तब तक टिकट बेचकर इकट्ठी की गई रकम स्टेशन पर मौजूद तिजोरी में रखी जाती है। स्टेशन मास्टर के बयान को सही मान लिया जाए तो जाहिर है कि अधिकारी कैश को लेकर गंभीर नहीं है। क्योंकि जिस स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था न के बराबर है वहां से रोजाना कैश मंगवाने में अधिकारियों को गुरेज है।


ये रहीं पहले की घटनाएं
लगभग दो साल पहले इलाके के पुरवा खेड़ा स्टेशन के पास बदमाशों ने दिल्ली से लखनऊ जा रही सद्भावना एक्सप्रेस का हौज पाइप काटकर मुसाफिरों से लाखों की लूटपाट की थी। जबकि पिछले साल बरेली के एक मसाला व्यापारी को दबतरा स्टेशन पर उतारकर बदमाशों ने लूटा था। इसके अलावा पिछले महीने करेंगी और रेवती स्टेशन के बीच में बदमाशों ने मालगाड़ी से डीजल लूटा था। ये सभी घटनाएं जीआरपी में दर्ज हैं लेकिन वर्कआउट के नाम पर जिम्मेदारों के हाथ खाली हैं।
... तो मास्टर माइंड भी हैं शामिल
बदमाशों ने लूटपाट की घटना को अंजाम देकर कंट्रोल फोन की लीड तोड़ी थीं। इससे जाहिर है कि घटना में कोई ऐसा व्यक्ति भी शामिल है जिसे यह जानकारी थी कि कौन से फोन से सूचनाएं दी जाती हैं। क्योंकि बदमाशों ने इन्हीं फोन की लीड तोड़ी थीं। इससे पहले बदमाशों ने पास के खंडहर में शराब पी थी। पुलिस ने खंडहर से बोतल, खाली गिलास और नमकीन बरामद की है।

नई उम्र के थे बदमाश
भुक्तभोगियों ने बताया कि सभी बदमाश नई उम्र के थे। उनकी भाषा स्थानीय थी, और चेहरे पर नकाब पहने थे। पुलिस अब इस नए गिरोह को चिह्नित करने के लिए हाथपांव मार रही है।

स्टेशनों पर नहीं हैं सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
बदायूं। बिसौली के दबतरी रेलवे स्टेशन पर बदमाशाें ने रविवार तड़के उत्पात मचाया और हजारों की नगदी लूट ली। इस घटना की पुनरावृत्ति कब और किस स्टेशन पर हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। इसके पीछे वजह यह है कि अपने यहां रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम ही नहीं हैं। बरेली से बदायूं के बीच बरेली जंक्शन के बाद बदायूं जिले की सीमा से निकलने तक एक दर्जन रेलवे स्टेशन और हाल्ट हैं लेकिन बदायूं रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाना और उझानी में जीआरपी की चौकी के सिवाए सुरक्षा के इंतजाम किसी भी स्टेशन पर नहीं हैं।
बदायूं स्टेशन से गुजरती हैं 16 ट्रेनें-
हर रोज बदायूं रेलवे स्टेशन से आठ जोड़ी गाड़ियां गुजरती हैं। इनमें तीन एक्सप्रेस, तीन फास्ट पैसेंजर और दो पैसेंजर गाड़ियां हैं। इनमें लगभग साढ़े चार हजार मुसाफिर यहां से सफर करते हैं। एक्सप्रेस गाड़ियां बरेली से चलने के बाद रामगंगा ब्रिज के बाद बदायूं स्टेशन, उझानी स्टेशन पर रुकती हैं। फास्ट पैसेंजर गाड़ियां रामगंगा ब्रिज, बमियाना, मकरंदपुर, घटपुरी, बदायूं, शेखूपुर, उझानी, वितरोई, कछला हाल्ट और कछला ब्रिज पर रुकती हैं। जबकि पैसेंजर गाड़ियां उक्त स्टेशनों के अलावा करतौली हाल्ट, मल्लननगर हाल्ट पर भी रुकती हैं।
सुरक्षा के नहीं हैं इंतजाम-
इन स्टेशनों और हाल्ट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। बदायूं रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाना है। यहां दो दरोगा, एक हेड कांस्टेबल, 13 सिपाही और एक ड्राइवर की तैनाती है। इसके अलावा उझानी रेलवे स्टेशन पर जीआरपी की चौकी है। स्टेशन पर आने वाले लोगों की तलाशी के लिए स्टेशनों पर मेटल डिटेक्टर भी नहीं लगाए गए हैं। इसके बाद भी जीआरपी किसी भी लूट आदि की घटनाओं को मुंहतोड़ जवाब देने का दंभ भर रही है। एसओ जीआरपी मान सिंह का कहना है कि स्टेशन पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं और जीआरपी किसी भी घटना से निपटने में सक्षम है।
अक्सर अंधेरे में डूबा रहता है स्टेशन
अक्सर रात में बिजली कटौती के बाद जेनरेटर चलाने में दस से पंद्रह मिनट तक लग जाते हैं जिससे मुसाफिरों को अंधेरे में रहना पड़ता है।

दबतरा स्टेशन से गुजरती हैं दस ट्रेनें-
दबतरा स्टेशन से दिनभर में दस ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें छह पैसेंजर और चार एक्सप्रेस ट्रेनें हैं।


... और नहीं टूटी पुलिस की नींद... लुट गया स्टेशन
बिसौली। इलाके में बढ़ रहीं लूटपाट की घटनाओं से इलाके की जनता में दहशत है। लोगों का कहना है कि सर्किल की पुलिस का नेटवर्क बदमाशों के आगे बौना साबित होता जा रहा है। दबतरा स्टेशन पर हुई लूटपाट के बाद यह जाहिर भी हो गया है।
स्टेशन से महज दो सौ मीटर दूर दबतोरी पुलिस चौकी है लेकिन 20 मिनट तक हुई लूटपाट और फायरिंग के बाद भी पुलिस की नींद नहीं टूटी और रेलवे को इसका खामियाजा भुगतना पड़ गया। यह इलाका चार जिलों की सीमा से सटा है। इसमें रामपुर, बरेली, मुरादाबाद और बदायूं शामिल हैं। वहीं पास में ही अरिल नदी की कटरी है। इतिहास गवाह है कि यह कटरी कुख्यात इलियास और हरिगिरी गिरोह की शरणस्थली रही है। वहीं सीमा से सटा होने की वजह से आसपास इलाके के बदमाशों की चहलकदमी बनी रहती है। बावजूद इसके तेजतर्रार कहे जाने वाले पुलिस महकमे के अधिकारियों ने सर्किल की जिम्मेदारी उन सुस्त अफसरों के कंधों पर सौंपी है, जो खुद समय काटने के लिहाज से नौकरी कर रहे हैं। यही वजह है कि चौकी की पुलिस गश्त के नाम पर खानापूरी करती है। इसी कारण लूटपाट के दौरान फायरिंग होने पर भी पुलिस के कानों तक गोली की आवाज नहीं गई और बदमाश आसानी से निकल गए।
डीजीपी की बताई, पुलिस ने उड़ाई
सूबे की पुलिस के मुखिया डीजीपी ने अपनी प्राथमिकता में इनामी बदमाशों की गिरफ्तारी को शामिल किया है। जिले भर के अधिकांश थानेदार इस लक्ष्य को पूरा करने में दिन रात एक किए हैं लेकिन इलाके में एक इनामी बदमाश के अलावा कई हिस्ट्रीशीटर भी खुलेआम घूम रहे हैं।

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