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बंधुआ बना लिए गए 190 मजदूर मुक्त

Badaun Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। मुफलिसी के मारे लोग रोजी-रोटी की तलाश में दूर देस गए तो मजबूरी का फायदा उठाने वालों ने उन्हें बंधुवा मजदूर बना लिया। वहां की सरकारों और श्रम विभाग के प्रयास से मुक्त कराए गए इस जिले के 190 बंधुवा मजदूर एक महीने के अंतराल में यहां भेजे गए हैं। श्रम विभाग के पास इनकी सूची पहुंचे के बाद उनका सत्यापन भी कर लिया गया है। अब प्रशासन इनके पुनर्वास की तैयारी कर रहा है।
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गरीबी और मजबूरी के बीच परिवार के पेट की आग बुझाना कितना मुश्किल भरा है, यह दर्द तो वही जान सकता है जो ऐसे हालातों में रहा हो। ककराला, उझानी, उसहैत, वजीरगंज क्षेत्र के ऐसे ही 190 लोग दो जून की रोटी की तलाश में अपने घरों से निकल कर दिल्ली, मुंबई, सिक्कम और गुजरात आदि राज्यों में जा पहुंचे। वहां उन्हें रोटी तो मिली लेकिन बंधुवा मजदूर बनकर। अधिकांश लोग ईंट भट्ठों पर काम में लगे तो गुलाम होकर रह गए। वहां की राज्य सरकारों ने ऐसे लोगों को चिन्हित कर उन्हें मुक्त कराकर घर भेजा। इसकी रिपोर्ट प्रदेश के श्रम विभाग को भी सौंपी गई। प्रशासन ने बंधुआ मजदूरों की सूची में शामिल लोगों की जांच जब एसडीएम से कराई गई तो उन्होंने भी यह तस्दीक की कि ये लोग यहीं के रहने वाले हैं।


बंधुआ बनाए मजदूरों में ये भी हैं शामिल
उझानी के हीरालाल पुत्र रामचरन, सहसवान के विजेंद्र, नेमसिंह, शिवलाल, भीमसेन पुत्र रामप्रसाद, सहसवान के राजकुमार पुत्र रामभरोसे, प्रेमवती आदि।

वर्जन-----
‘बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास के लिए प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। उन्हें 20 हजार की मदद देने के साथ ही जरूरतमंद को पट्टे पर भूमि, अपना कारोबार शुरू करने के लिए ऋण व अनुदान सहित अन्य सरकारी सहायता दिए जाने का प्रावधान है। श्रमिक को उसकी स्थिति के आधार पर मदद की जाएगी।’-बलीराम, श्रम प्रवर्तन अधिकारी, बदायूं।

वर्जन-----
बंधुआ मजदूरों की मदद के लिए जरूरी उपाय किए जाएंगे। मामला बेहद गंभीर है। -जीएस प्रियदर्शी, डीएम

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