राम का दरबार सजाते हैं शहंशाह

Badaun Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
सिलहरी। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का जन्म हो या लीलाएं या फिर विवाह का मंचन। रामलीला में होने वाले इन कार्यक्रमों के लिए रोशनी की जरूरत हो तो सभी की जुबां पर शहंशाह का ही नाम आता है। श्रीराम के जीवन से प्रेरित शहंशाह राम के दरबार से लेकर उनके वनवास और दशानन से युद्ध तक रोशनी की व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हैं। खास बात यह है कि इस कार्य के बदले में वह अपनी ओर से कुछ नहीं मांगे, आयोजक मंडल जो कुछ दे देता है वह उसी में संतुष्ट रहते हैं।
शहर के गांधीपार्क में हर साल अक्तूबर में प्रदर्शनी लगती है। इसके अलावा यहां रामलीला का आयोजन भी होता है। प्रदर्शनी में हर साल कुछ न कुछ बदलाव तो दिख जाते हैं लेकिन जिस मंच पर श्रीराम के जीवन का चित्रण होता है वहां शहंशाह ही दिखते हैं। शहर के मोहल्ला चौधरीगंज रहने वाले शहंशाह अहमद शादी-समारोह समेत अन्य कार्यक्रमों में लाइटिंग का काम करते हैं।
बकौल शहंशाह सन 2001 में वह परिवार के साथ प्रदर्शनी देखने गए थे, यहां श्रीराम कथा का मंचन देखकर उनसे प्रेरित हो गए। शहंशाह ने उसी दिन से वहां लाइटिंग की व्यवस्था करने की ठान ली। अगली साल पुन: रामलीला हुई तो उन्होंने कमेटी के लोगों से इसकी डेकोरेशन करने की बात रखी। मोलभाव के बिना बात ऐसी बनी कि अभी तक वह मंच की सजावट कर रहे हैं।
लेबर का खर्चा निकल जाए इतना ही काफी
शहंशाह अहमद के मुताबिक श्रीराम लीला महोत्सव में उनके पास से केवल बिजली का सामान जाता है। डेकोरेशन का सारा काम लेबर करती है। खुद तो फ्री में काम कर भी दें, लेकिन मजदूरों के पेट से खिलवाड़ नहीं कर सकते। इसलिए कार्यक्रम के बाद लेबर का खर्चा निकल आता है। इतना ही काफी है। घर का खर्च चलाने को पूरे साल कार्यक्रम मिलते रहते हैं।

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