पहले बाढ़ ने रुलाया अब व्यवस्था ने

Badaun Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
बदायूं। दैवीय आपदा राहत के नाम पर भले ही अभी तक एक करोड़ की जारी हुई हो लेकिन यहां बड़ संख्या में बाढ़ पीड़तों को आर्थिक मदद ही नहीं मिली। ऐसे में ये ग्रामीण बदहाली की जिंदगी जी रहे हैं। बाढ़ में फसल, जमीन व घर गंवाने वाले ग्रामीणों की जिंदगी पटरी पर नहीं आ रही है।
इस साल भी कादरचौक में जोरीनगला, लक्ष्मणनगला, रामसहाय नगला के अलावा दातागंज व उसहैत में कई इलाके बाढ़ से प्रभावित हुए थे। इसमें दर्जनों किसानों की जमीन पर खड़ फसल को काफी नुकसान पहुंचा था। इस साल अप्रैल से अभी तक दैवीय आपदा राहत के तहत एक करोड़ रुपये की धनराशि जारी हुई है। इसमें बाढ़ के साथ ही अग्निपीड़त भी शामिल है। गंभीर बात यह है कि प्रशासन ने इस राहत कोष से सिर्फ 14 लाख रुपये की धनराशि गृह अनुदान के लिए जारी की गई है, जो सिर्फ तेलीनगला के ग्रामीणों को मिली। बड़ संख्या में बाढ़ पीड़त अभी भी गृह व फसलों के नुकसान के लिए आर्थिक मदद के लिए भटक रहे हैं। आए दिन अफसरों के यहां दरख्वास्त देते वे थक-हार चुके हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
फसल के नुकसान को नहीं मिली मदद
कादरचौक के लक्ष्मणनगला के बाढ़ पीड़त रामवीर सिंह यादव ने कहा कि बाढ़ के पानी में फसल चौपट हो गई थी। इस नुकसान की भरपाई के नाम पर शासन से एक रुपये की आर्थिक मदद उसे नहीं मिली है। ऐसे में उसे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
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आर्थिक मदद न मिलने को पड़ रहा भटकना
मुंशीनगला के कलाम हुसैन ने बताया कि बाढ़ से हुए नुकसान के बाद एक दाना भी अन्न पैदा नहीं हुआ। सब कुछ नष्ट हो गया लेकिन सरकार से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है। ऐसे में वे जबरदस्त आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं।
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ज्यादा से ज्यादा बाढ़ पीड़तों को राहत देने की कोशिश की गई है। हां यह सच है कि अभी काफी लोगों को मदद नहीं मिल सकी है।
जयंत कुमार दीक्षित, एडीएम राजस्व

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