कंपनी कमांडर भी करते हैं पहरेदारी

Badaun Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
बदायूं। कहने को तो होमगार्ड अनुशासित बल की फेहरिस्त में शुमार है लेकिन आर्थिक तंगी इस महकमे के अनुशासन को तार-तार कर देती है। वजह है कि पूरी कंपनी के निर्देशन और देखरेख के लिए तैनात कंपनी कमांडर भी अक्सर वहीं पहरा देते हैं, जहां कंपनी का जवान पहरेदारी कर रहा होता है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कमांडर का मानदेय महज 450 रुपये प्रतिमाह है। महंगाई के दौर में इतने मानदेय पर होमगार्डों को निर्देशन देने के साथ कमांडर खुद भी अधीनस्थों के साथ ड्यूटी करते हैं।
जिले में होमगार्ड की 22 कंपनियां हैं। हर कंपनी के जवानों के लिए प्रशिक्षण से लेकर उनके निर्देशन तक एक कंपनी कमांडर, एक सहायक कंपनी कमांडर और तीन प्लाटून कमांडर होते हैं। कंपनी कमांडर अपने अधीनस्थ प्लाटून कमांडर को निर्देश देंगे और संबंधित प्लाटून कमांडर अपने 25 होमगार्डों की प्लाटून लेकर निर्देश का पालन करेगा, लेकिन अनुशासन की यह डोर इस विभाग में जब-तब टूट जाती है। क्योंकि मानदेय कम होने की वजह से कमांडर से लेकर अन्य अधिकारी खुद ड्यूटी करते हैं। ऐसे में होमगार्डों को न निर्देशन मिल पाता है और न ही कमांडर उनकी समस्याएं विभाग के अधिकारियों तक पहुंचा पाते हैं। नतीजतन होमगार्ड संबंधित थानेदार का ज्यादा और अपने कमांडर का आदेश कम मानते हैं।

ये है अधिकारियों का मानदेय
अवैतनिक होने की वजह से होमगार्डों को मानदेय दिया जाता है। कंपनी कमांडर को साढ़े चार सौ रुपये मिलते हैं और सहायक को महज साढ़े तीन सौ रुपये में अपनी गुजर करना पड़ती है। इसके अलावा प्लाटून कमांडर तीन सौ रुपये मानदेय पाते हैं। खास बात यह है कि विभाग ने पुलिस के कंधे से कंधा मिलाने की फौज तो खड़ी कर दी लेकिन उसके निर्देशन का बंदोबस्त नहीं किया है।

शासन को की है लिखा पढ़ी

कंपनी के अधिकारियों का मानदेय बढ़ाए जाने के लिए शासन स्तर पर लिखा पढ़ी की गई है। आगे की कार्रवाई शासन से होगी, उम्मीद है कि अनुशासित बल की मर्यादा बनाए रखने के लिए इस पर प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
महेंद्र सिंह, जिला कमांडेंट होमगार्ड

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