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मिड-डे मील पर भी महंगाई की मार

Badaun

Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
बदायूं। कुकिंग गैस सिलेंडरों की संख्या सीमित करने और दाम बढ़ा दिए जाने के बाद जिले के तमाम स्कूलों में मिड-डे मील बनाने का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि कुछ स्कूलों ने इस समस्या का हल ढूंढते हुए चूल्हे और लकड़ी पर खाना पकाना शुरू कर दिया है। ऐसा स्कूलों को सिलेंडर नहीं मिलने की वजह से किया जा रहा है। हर दिन 50 से अधिक विद्यालयों में भोजन नहीं पक रहा है।
आंकड़े इस बात के गवाह है कि जिले में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 2438 है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार हर दिन 2400 स्कूलों में खाना बन रहा है। बच्चों की संख्या की अपेक्षा सिलेंडरों की खपत बहुत ज्यादा हो रही है। एक स्कूल को पहले जरूरत के हिसाब से मिलते थे, लेकिन अब माह में दो सिलेंडर मिलने भी मुश्किल हो गए हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार हर माह 7500 सिलेंडर की खपत थी। यह सिलेंडर ग्राम शिक्षा समिति के सदस्य खुद जाकर एजेंसियों से लाते थे। प्राइमरी स्कूल के एक बच्चे पर 3.11 रुपये और उच्च प्राइमरी स्कूल के बच्चों पर 4.60 रुपये कंवर्जन कास्ट के खर्च हो रहे हैं, लेकिन सिलेंडर की रकम बढ़ने से यह प्रभावित हो रही है। क्योंकि सिलेंडर की रकम भी प्रति बच्चे के हिसाब से इसमें जुड़ी है।
चूल्हे पर बनता है खाना
कुकिंग गैस की मार से बचने के लिए कुछ स्कूलों ने समाधान भी निकालने शुरू कर दिए है। कुछ ऐसा ही देखने को मिला प्राथमिक स्कूल सराय फकीर, कन्या उच्च प्राथमिक स्कूल नगर क्षेत्र, प्राथमिक स्कूल सोथा नंबर एक में बच्चों का मिड-डे मील चूल्हे और लकड़ी से पकाया जा रहा था। यहां सिलेंडर न मिलने की वजह से ऐसा किया गया। उच्च प्राथमिक स्कूल सांडी में सिलेंडर न मिलने से खाना बंद पड़ा है। खाना पकाने को रसोइया मिट्टी का चूल्हा बना रही हैं। प्राथमिक स्कूल सैजनी में भी कभी-कभार ही खाना बन रहा है। प्राथमिक स्कूल बिरिया डांडी में खाना लकड़ी पर बन रहा है।
बिना सिलेंडर कैसे पके भोजन
प्रधानाचार्य ने कहा खड़ा हो गया है संकट
प्राथमिक स्कूल सराय फकीर की प्रभारी प्रधानाध्यापक रोशन अख्तर का कहना है कि सिलेंडर सीमित करने पर संकट खड़ा हो गया है, बच्चों को तो खाना जैसे-तैसे बस दिया ही जा रहा है।
मिड डे मील होगा प्रभावित
कन्या उच्च प्राथमिक स्कूल नगर क्षेत्र की प्रधानाध्यापक मेहरजबीं कहती हैं कि सिलेंडर के महंगा होने से मिड-डे मील प्रभावित होगा, लेकिन सदस्य फिर बच्चों को खाना पहुंचा रहे हैं।
सिलेंडर नहीं होने थे सीमित
प्राथमिक स्कूल सोथा नंबर दो की अध्यापक निख़त कहती हैं कि सिलेंडर सीमित नहीं किए जाने थे। इससे कंवर्जन कास्ट प्रभावित होगी। गुणवत्ता भी प्रभावित होने की आशंका होगी।
चूल्हे पर पकेगा खाना
प्राथमिक स्कूल सांडी के प्रधानाध्यापक रामवीर सिंह का कहना है कि सिलेंडर आदि न मिलने से खाना नहीं बन रहा है। रसोइया से मिट्टी का चूल्हा बनवाया है अब उसी पर खाना पकेगा।
नहीं मिले हैं सिलेंडर और सामान
वार्ड नंबर 26 के सदस्य नजीब अहमद हमीदी का कहना है कि वह चार स्कूलों में मिड डे मील का संचालन कर रहे हैं, लेकिन पूर्व सदस्य ने न तो सिलेंडर दिए और न ही सामान। इसलिए मिड-डे मील लकड़ी से बना रहे हैं। विभाग के अफसरों को भी बताया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
सिलेंडरों की संख्या सीमित करने और दाम बढ़ाने पर मिड-डे मील पर संकट मंडराने लगे हैं। जिलेभर से शिकायत मिल रही है कि सिलेंडर के रेट काफी लिए जा रहे हैं। इसको लेकर संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर हल निकाला जाएगा। सभी प्रधानाध्यापकों से कहा गया है कि जैसे-तैसे मिड-डे मील का संचालन रखें।
कृपाशंकर वर्मा, बीएसए
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