कैदी सुरक्षित हैं न जेल

Badaun Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
बदायूं। अपराधियों को सुधारकर उन्हें जुर्म के दलदल से निकलाने के लिए बनाई गई जेल सुरक्षित नहीं है। सुरक्षा के मानकों को धता बताकर यहां कैदी और बंदी रखे गए हैं। यहां की चहारदीवारी पर न तो फोकस लाइटें लगी हैं और न ही दीवारों के ऊपर नंगे तार से करंट प्रवाहित किया जाता है। ऐसे में बंदी दीवार फांदकर भाग जाएं या बाहरी लोग बंदियों को इसी रास्ते नुकसान पहुंचा दें। जेल प्रशासन को इसकी परवाह नहीं।
लगभग 630 बंदियों की क्षमता वाले जिला कारागार में इन दिनों डेढ़ हजार से अधिक कैदी और बंदी भरे हुए हैं। बंदी जेल से भाग न जाएं इसके लिए जेल प्रशासन सुरक्षा के कड़े इंतजाम का दावा करता है लेकिन यहां की सुरक्षा व्यवस्था कितनी दुरुस्त है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक बंदी ने जेल के अंदर फांसी लगाकर जान दे दी तो लूटपाट के आरोपी फिरासत नाम के बंदी को जेल में लगभग तीन इंच लंबी सुई मिल गई थी। यह सुई फिरासत ने अपने पेट में घुसा ली। बाद में उसने जिला अस्पताल में आत्महत्या भी कर ली थी।
जिक्र यदि बाहरी सुरक्षा का हो तो यहां भी इंतजामात का टोटा है। मैनुअल के अनुसार जेल की चाहरदीवारी के चारों कोनों पर फोकस लाइटें लगनी चाहिए। ताकि रात में दीवार में सेंधमारी न की जा सके। दीवारों के ऊपर करंट भी दौड़ाया जाता है।
जिम्मेदार अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करते हैं। दावा होता है कि निरीक्षण औचक था। कभी-कभार की बात छोड़ दी जाए तो हमेशा अधिकारियों को जेल में सबकुछ ओके मिलता है। जबकि मानकों का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है।
कुछ जेलों में फोकस लाइट लगी हुई हैं लेकिन हमारे यहां यह सुविधा नहीं है। सुविधा क्यों नहीं है, इसकी जिम्मेदारी शासन की है।
उमेश सिंह, जेलर

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