‘समस्याओं का निवारण श्रीरामकथा में निहित’

Badaun Updated Sun, 09 Sep 2012 12:00 PM IST
बदायूं। कथा व्यास स्वामी प्रबोधानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा एक ऐसा प्रयाग है, जिसमें जीव अपने जीवन की सभी समस्याओं का निवारण खोज सकता है। उन्होंने बताया कि श्रीरामकथा के प्रथम आचार्य रचयिता एवं वक्ता महाकाल भगवान शंकर हैं। महादेव ने सौ करोड़ श्लोकों में श्रीराम कथा की रचना की। इसे संसार के कल्याण के लिए समान रूप से संत, देवता और राक्षसों में बांट दिया। इस प्रकार यह कथा महर्षि वाल्मीकि महाराज ने कथा की रचना की और लोकार्पण श्रीराम दरबार में लव-कुश ने किया।
स्वामी जी शहर के श्रीरामलीला मैदान में कथा का प्रवचन कर रहे थे। इससे पूर्व आयोजन समिति के सदस्यों ने श्रीराम दरबार के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके पुष्पार्चन किया। स्वामी जी ने कहा कि श्रीरामकथा को हिंदी भाषा में लोक कल्याण के लिए रामभक्त हनुमान जी ने गोस्वामी तुलसीदास से रामचरितमानस के रूप में कराई। इसी तरह पति-पत्नी केबीच विवाद होने पर समस्या का समाधान न हो तो मौन धारण करना चाहिए और प्रभु की शरण में जाकर प्रार्थना करना चाहिए। इसके अलावा स्वामी जी ने भजन-कीर्तन और कहानियों के माध्यम से श्रोताओं के मन में श्रीराम के प्रति आस्था की ज्योति प्रज्ज्वलित की। कार्यक्रम में अरविंद कांत, धीरज सक्सेना, विपिन अग्रवाल, मुकेश रस्तोगी, शिवकुमार वर्मा, भारत सिंह यादव, महेश गुप्ता, हरिभगवान अरोरा, स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता, संतोष यादव, ओमप्रकाश मथुरिया, उज्जवल गुप्ता आदि मौजूद रहे। मंच का संचालन कामेश पाठक ने किया।

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