जांच में फंसेगी बड़े-बड़ों की गर्दन

Badaun Updated Thu, 06 Sep 2012 12:00 PM IST
बदायूं। अल्पसंख्यक बहुल गांवों के विकास के लिए लागू हुए मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोग्राम में मिले पैसे से कराए गए कार्यों की जांच शुरू हो गई है। इसमें कई बड़े अधिकारियों की गर्दन फंसने की उम्मीद की जा रही है। इसमें पांच सौ से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों के घटिया निर्माण का मामला पहले ही उजागर हो चुका है। अब इनके साथ ही इंद्रा आवासों के निर्माण में भी तमाम खामियां सामने आने लगी हैं।
अल्पसंख्यक बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2009-10 में यह प्लान जिले में लागू किया गया था। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने सर्वे कराकर इंदिरा आवास, आंगनबाड़ी केंद्र, हैंडपंप सहित कई कार्यों के लिए सरकार को 58 करोड़ 10 लाख का प्रोजेक्ट भेजा था। करोड़ों का यह प्लान अभी पूरा तो नहीं हो सका, लेकिन इसके दो बड़े प्रोजेक्ट विवादों में फंस गए हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार कार्यदायी संस्था पैकफेड को इस प्लान के लिए 30 करोड़ 65 लाख की लागत से 720 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण का काम सौंपा गया था। अब तक 507 केंद्रों के भवन तैयार हुए हुए हैं। पिछले दिनों इनमें ज्यादातर के घटिया निर्माण होने का मामला सामने आया था। सीडीओ सूर्यपाल गंगवार ने इस मामले की जांच शुरू कराई थी। इसके बाद इस मामले की जानकारी कमिश्नर को भी दे दी गई। सो अब कमिश्नर स्तर से भी इस मामले की जांच शुरू करा दी गई है। सूत्र बताते हैं कि जल्द ही उच्चस्तरीय टीम यहां पहुंचकर प्रकरण की जांच करेगी। जांच के चलते विवादों के घेरे में आए आंगनबाड़ी केंद्रों को बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को हस्तानांतरित करने पैर पहले ही रोक लगा दी गई थी ।
एमएसडीपी में ही 4301 इंदिरा आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई थी। इसके लिए सरकार ने करीब 15 करोड़ का भारी भरकम बजट दिया था। इन आवासों का निर्माण जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के माध्यम से कराया गया। जांच में सलारपुर ब्लाक के बरीसमसपुर में आवंटन से लेकर निर्माण तक में कई खामियां सामने आईं। इस मामले में सेक्रेटरी व लिपिक पर रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई है। इसी तरह ब्लाक दहगवां के तोडपुर करसरी में भी आवास निर्माण का बड़ा घपला सामने आया था।
नहीं मिले सही आंकड़े
आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की जांच के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से डीएसटीओ ने रिपोर्ट मांगी तो उसे तय प्रारूप पर नहीं दिया गया। अल्पसंख्यक विभाग ने इसे प्रोफार्मा पर नहीं दिया, जिससे डीएसटीओ दफ्तर ने यह रिपोर्ट वापस भेज दीं, जिससे जांच में देरी हो रही है।
पुराने काम विवादित, नए के लिए फिर 38 करोड़
एमएसडीपी में कराए गए करोड़ों के काम भले ही अभी विवादों में हैं, लेकिन सरकार ने इस प्लान के लिए 38 करोड़ और देने को हरी झंडी दे दी है। अब इस रकम से एक बार फिर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को नए प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेजेगा।
एमएसडीपी में बने इंदिरा आवास व आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण में गड़बड़ी के जो मामले सामने आए हैं, उनकी जांच हो रही है। दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।
सूर्यपाल गंगवार, सीडीओ

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