झुलस रहे धान को मिली संजीवनी

Badaun Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
रोपाई के बाद से धान पर मंडरा रहे थे संकट के बादल
कृषि विज्ञानियों को अभी और बरसात की उम्मीद
कल्ले फूटने के वक्त पर पानी को तरसी थी फसल
उझानी(बदायूं)। रोपाई के बाद से धान पर मंडरा रहे संकट के बादल अब छंटने लगे हैं। हालांकि कल्ले फूटने के समय पौधों को जरूरत के अनुसार पानी नहीं मिला लेकिन तीन दिन से रुक-रुककर हो रही बरसात ने धान को संजीवनी प्रदान कर दी है।
धान की रोपाई इस बार बरसात बहुत कम होने से काफी लेट शुरू हुई थी। जहां भी किसानों ने उन दिनों बरसात पर आसरा किया वहां-वहां रकबे में गिरावट आंकी जा रही है। उत्पादक कहते हैं कि पैदावार इस बार उम्मीद के अनुरूप नहीं रहेगी। इसकी मुख्य वजह कल्ला फूटने के दिनों में फसल पर सूखे का साया था। हरियाली भी कम बरसात की वजह से गायब होने लगी थी। हाल ही में हुई बरसात से हरियाली के साथ ही धान उत्पादकों के चेहरे पर कुछ हद तक मुस्कान भी लौट आई है।
कृषि विज्ञानियों को भी धान की फसल के अच्छे दिन आने की उम्मीद है। उनका मानना है कि बरसात लेट हुई है, सो आने वाले दिनों में भरपाई भी हो सकती है। कृषि वैज्ञानिक अर्जुन सिंह ने बताया कि किसानों को फसल में घास नहीं उगने देना चाहिए। खरपतवार भी समय पर नष्ट कर दिया जाए तो उत्पादन अच्छा रहेगा। फसल में उचित मात्रा में ही उर्वरक को इस्तेमाल किया जाए।
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उड़द-बाजरा के भी दिन बहुरे
उड़द और बाजरा की फसल के साथ तिल की फसल को भी काफी हद तक फायदा मिला है। उड़द की बुआई उसके अनुरूप दिनों में हो चुकी है। जबकि बाजरा की फसल इस वक्त बढ़वार की ओर है। उत्पादकों का कहना है कि उड़द और बाजरा की बंपर पैदावार होने की संभावना है।

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