कई गरीबों को नहीं मिल पाता एलपी का लाभ

Badaun Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
दवा के लिए मिलता है 80 लाख, इसका 15 फीसदी होती है लोकल पर्चेज
महकमे के पास पिछले साल के एलपी के बिल अभी तक नहीं पहुंचे
अब तक की जा चुकी है एक लाख की लोकल दवा खरीद
बदायूं। दवाओं की स्थानीय खरीद(एलपी) उन्हीं मरीजों के लिए की जानी चाहिए जो गरीबी रेखा से नीचे यानी बीपीएल कार्ड धारक हों या फिर दीनहीन, लेकिन जिला अस्पताल में साधन संपन्न लोगों के लिए भी ऐसा किया जा रहा है। लाभ न मिलने पर गरीब अपने से ही दवाएं खरीदते हैं। अफसरों का कहना है कि दवाएं नियमानुसार लोकल पर्चेज की जाती हैं।
जिला अस्पताल को हर साल लगभग 80 लाख रुपये दवाओं के लिए मिलता है। इसका 15 प्रतिशत दवाएं लोकल पर्चेज (एलपी) की जा सकती हैं, लेकिन यहां अधिक की जा रही हैं। यही कारण है कि अभी तक वर्ष 2011 में खरीदी गई दवाओं के बिल तक नहीं मिले हैं। चालू वर्ष में लगभग एक लाख रुपये की दवाओं की खरीद लोकल स्तर से की जा चुकी है। इसमें गरीबों की संख्या कम और साधन संपन्न लोगों की संख्या अधिक बताई जा रही है।
शेखूपुर निवासी राधेश्याम, जगत गांव के रामजीलाल का कहना है कि आंख-कान की ड्रॉप लेने आए थे, लेकिन वह खत्म हो गई। खरीद के लिए अधिकारियों से कहा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि हम बीपीएल कार्ड धारक हैं।
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ये है नियम
जिस मरीज के लिए दवा की एलपी की जाती है उसकी पर्ची अस्पताल कर्मचारी के माध्यम से चयनित दवा विक्रेता के पास जाती है। वहां से तीन दिन के अंदर विक्रेता को दवा फार्मासिस्ट को मुहैया करानी पड़ती है। उसकी बाकायदा एंट्री होती है। उसके बाद मरीज को दी जाती है, लेकिन यहां पर्ची लोग खुद ले जाते हैं और दवा भी शीघ्र मिल जाती है।
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इन दवाओं का रहता है अभाव
अस्पताल में दवाओं का अभाव रहता है। इनमें मेट्रोजिल, कैल्शियम टेबलेट, एंटीबायॉटिक, सेप्ट्रान, आई और इयर ड्रॉप, ब्रूफेन, इंजेक्शन आरएल, पैरासिटामोल, एटीनोलॉल आदि शामिल हैं।
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शासन के नियमानुसार लोकल स्तर से दवाएं क्रय की जाती हैं। बीपीएल कार्ड धारक, सरकारी कर्मचारियों और दीनहीन लोगों को इसका लाभ दिया जाता है, लेकिन दवा के कुल बजट का 15 से 20 फीसदी ही खरीद सकते हैं।-डॉ. नरेंद्र कुमार, सीएमएस

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