लाखों खर्च फिर भी पुरस्कार के लिए आवेदन नहीं

Badaun Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
स्वच्छता अभियान के नाम पर खर्च किए गए दो करोड़
सिटी रिपोर्टर
बदायूं। जिला पंचायतराज विभाग ने स्वच्छता अभियान के नाम पर करीब दो करोड़ पानी की तरह बहा दिए। इसके बाद भी निर्मल ग्राम पुरस्कार के लिए कोई आवेदन नहीं किया गया। इससे साफ होता है कि खुद विभाग स्वच्छता अभियान के तहत कराए गए कार्य से संतुष्ट नहीं है।
स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में सामुदायिक व व्यक्तिगत शौचालय बनवाने के लिए पंचायतराज विभाग को हर साल लाखों रुपये का बजट मिलता रहा है। पिछले साल भी इस अभियान के लिए अंबेडकर गांवों में 44 सौ शौचालय बनवाने के लिए दो करोड़ से ज्यादा की धनराशि जारी की गई थी। शौचालय बनवाने के लिए चार हजार पांच सौ पचास रुपये प्रत्येक बीपीएल लाभार्थी को बतौर इमदाद दी गई। ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना भी इस अभियान की एक कड़ी थी। हर साल निर्मल पुरस्कार के लिए ग्राम पंचायतों के चयन में इस अभियान की खास भूमिका रहती है। खास बात यह रही कि विभाग ने इस अभियान के नाम पर पिछले साल दो करोड़ से ज्यादा का बजट खर्च तो कर दिया लेकिन पुरस्कार के लिए विभाग ने एक भी आवेदन सरकार को नहीं भेजे। इससे यह भी साफ है कि विभाग ने इस अभियान के लिए मोटी रकम भले खर्च कर दी हो लेकिन कार्य से वह खुद भी संतुष्ट नहीं है।
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गांवों में ठप पड़ा स्वच्छता कार्यक्रम
इस साल से सरकार ने स्वच्छता अभियान तो बंद कर दिया है लेकिन उसकी जगह पर शुरू होने वाला निर्मल भारत अभियान अभी तक लागू नहीं हो सका है। उसके लिए अभी सर्वे और बाद में बजट का इंतजार किया जाना बाकी है। ऐसे में गांवों में स्वच्छता कार्यक्रम पूरी तरह से ठप है।
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क्या है निर्मल पुरस्कार
साफ-सफाई के प्रति जागरूक होने के साथ ही सभी घरों में शौचालय निर्माण से संतृप्त होने वाली ग्राम पंचायतें इस पुरस्कार के लिए सरकार को आवेदन करती हैं। जांच के बाद मानकों पर खरा उतरने पर उन्हें राष्ट्रपति खुद इस पुरस्कार से सम्मानित करते हैं।
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निर्मल पुरस्कार के लिए इस साल अभी तक कोई आवेदन नहीं भेजा गया है। आमतौर पर मार्च-अप्रैल तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। जहां तक स्वच्छता कार्यक्रम में काम की बात है तो विभाग ने इसमें कोई लापरवाही नहीं बरती है।
एके शाही, जिला पंचायत राज अधिकारी

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