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पूर्व विधायक सागर के रिवीजन पर सुनवाई हुई, फैसला 22 को

Badaun Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। जिला सेशन जज योगेंद्र पाल सिंह की अदालत में शनिवार को पूर्व एमएलए योगेंद्र सागर की उस मामले पर सुनवाई हुई जिसमें सागर अन्य दो आरोपियों के साथ छात्रा के अपहरण और सामूहिक बलात्कार के मामले में नामजद हैं। गिरफ्तारी से बचने को सागर ने तलवी के खिलाफ देरी से रिवीजन दायर किया था। फलस्वरूप हाईकोर्ट ने जिला जज को मामला सुपुर्द करके एक माह में निर्णय सुनाने को कहा है।
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शनिवार सुबह 11 बजे भीड़ से भरी अदालत में डीजे ने उभय पक्ष की ओर से सुनाए गए। तर्क वितर्कों को सुना गया। अंत में उन्होंने फैसला देने की 22 अगस्त तय की है। विदित हो कि इस बेहद चर्चित एंव संगीन मामले में सहेली के घर से नोट्स लेने जा रही बीए की छात्रा का दोपहर 12 बजे अपहरण कर लखनऊ में रखा गया और नशीले इंजेक्शन दिए गए। सामूहिक बलात्कार भी किया गया। पोल खुलने पर पूर्व बसपा विधायक योगेंद्र सागर सहित उनके रिश्तेदार तेजेंद्र और साथी मीनू शर्मा निवासी बिल्सी ने विदेश में छात्रा को बेचने की कोशिश की। आरोपी सत्ता पक्ष के विधायक होने के कारण ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने में ढिलाई बरती। फलस्वरुप मजिस्ट्रेट कोर्ट ने तीनों आरोपियों को तलब किया। इसमें तेजेंद्र और मीनू शर्मा स्थानीय जेल में बंद हैं। जबकि तत्कालीन बिल्सी विधायक सागर को पुलिस गिरफ्तार करने की हिम्मत न जुटा सकी। वे कानून को धता बता कानूनी दांवपेच से बचते रहे। आखिरकार हाईकोर्ट ने जिला सेशन कोर्ट को एक माह का समय देकर तलवी के खिलाफ देरी से दायर किए गए रिवीजन पर फैसला देने की सख्त हिदायत दी है।
सूत्रों की मानें तो सागर को रिवीजन के मंजूर होने मेें कोई दिलचस्पी नहीं है। वे तो सिर्फ मामले को इसलिए उलझाए रखना चाहते हैं ताकि कोर्ट मेें हाजिर होने से खुद को बचाएं रखें। वरना बाकी दोनों सहआरोपियों का हश्र तो दिख ही रहा है, एक बार सरेंडर हुए तो अब तक जेल की हवा खा रहे हैं।

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