टूटी सड़कों के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं

Badaun Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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अनूप गुप्ता
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बदायूं। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) का करीब सौ करोड़ का सड़कों का प्रोजेक्ट तीन साल से ठप पड़ा हुआ है। पीडब्ल्यूडी हर साल संशोधित प्रस्ताव भेज रहा है लेकिन बजट के नाम पर अभी तक एक पाई भी नहीं जारी हुई है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में सड़कों का न तो नया निर्माण हो पा रहा है और न ही खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत हो पा रही है।
काफी पिछड़े और सुदूर गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए पीएमजीएसवाई शुरू की गई थी। इसमें संपर्क मार्गों को जोड़ने के लिए हर साल लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को प्रस्ताव राज्य सरकार भेजना होता है। बाद में मंजूर सड़कों के निर्माण को बजट केंद्र सरकार से जारी करती है। इधर, वर्ष 2008 से पीएमजीएसवाई के तहत सड़कों के निर्माण का प्रोजक्ट पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। इस वर्ष पीडब्ल्यूडी ने सड़कों के निर्माण के लिए सौ करोड़ के प्रस्ताव तैयार किए थे। उसके बाद से महकमा हर साल महंगाई को देखते हुए सड़क लागत में संशोधन करते हुए प्रस्ताव सरकार को भेजता रहा है लेकिन अभी तक विभाग को सड़क निर्माण के लिए बजट के नाम पर एक फूटी कौड़ी भी जारी नहीं की गई है। पीडब्ल्यूडी ने मौजूदा वित्तीय साल के लिए भी 146 किलोमीटर का प्रोजेक्ट बनाकर सरकार को भेजा है। इधर, पीएमजीएसवाई का काम ठप होने से ग्रामीण इलाकों में सड़कों का निर्माण नहीं हो पा रहा। ऐसे में नए संपर्क मार्गों से विकास की रफ्तार जो कभी बढ़ी थी, उसका पहिया थम गया है।
तीन साल बाद आई सुधि
पीएमजीएसवाई के तहत सड़कों का निर्माण भले ही वर्ष 2008 से बंद पड़ा हो लेकिन सपा के वरिष्ठ नेता व सांसद धर्मेंद्र यादव को इस ओर ध्यान देने में तीन साल लग गए। हाल ही जिला सतर्कता व निगरानी समिति की अध्यक्ष व आंवला भाजपा सांसद मेनका गांधी की बैठक में जब यह मामला उठा तो वहां मौजूद सांसद श्री यादव ने पीडब्ल्यूडी ने जो प्रस्ताव तैयार किए हैं, उसका धन जारी कराने के लिए वह मुख्यमंत्री स्तर से प्रयास करेंगे।

पीएमजीएसवाई के लिए पीडब्ल्यूडी ने अलग से सेल तैयार की थी, जिसमें विभाग के ही सहायक अभियंता और अवर अभियंताओं की टीम गठित की गई थी। इधर, पीएमजीएसवाई का काम ठप हुआ तो उसकी गठित सेल का वजूद भी समाप्त हो गया और विभाग ने सेल को दिए गए इंजीनियरों को भी वापस महकमा ने अन्य कार्यों केलिए लगा दिए।
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