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जनरल पैनी की हत्या से हुआ था जंगे आजादी का ऐलान

Badaun Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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ककराला (बदायूं)। वर्ष 1857 में जब जंग-ए-आजादी का आगाज हुआ था तो कस्बे में भी ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बिगुल बज गया। अंग्रेजी सल्तनत की जुल्म और ज्यादतियों के विरुद्ध सिर पर कफन बांधकर उतरे आजादी के दीवानों ने अंग्रेज अफसर जनरल पैनी की हत्या कर दी थी, जिसके साथ ही कस्बे में गुलामी से मुक्ति के गीत भी परवान चढ़ते चले गए।
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इतिहास के पन्ने बताते हैं कि जिला मुख्यालय से तकरीबन 14 किलोमीटर दूर इस कस्बे को बसे 432 साल गुजर चुके हैं। वर्ष 1857 की जंग में जनरल पैनी को इसी कस्बे में मौत के घाट उतर दिया गया। ये वही अंग्रेज अफसर था, जिसके जुल्म से लोग थरथराते थे। न जाने कितने बेकसूरों के खून से हाथ रंगने वाले इस अंग्रेज अधिकारी की हत्या कर स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों ने आजादी की जंग का ऐलान कर दिया। कस्बा वासियों के जुनून के आगे अंग्रेजों के हौसले पस्त होने लगे। बताते हैं कि अंग्रेज अधिकारी जनरल पैनी फौज लेकर उसहैत की ओर से ककराला की ओर बढ़ रहा था। फौज तोप और घुड़सवारों से लैस थी। आगे बढ़ती फौज जब ककराला से करीब एक मील पहले पहुंची तो कस्बे के ही मुजाहिदीन को इसकी जानकारी लग र्गई। इसके बाद कस्बे के अन्य आजादी के दीवानों को खबर लगी और दोनों ही ओर से लड़ाई छिड़ गई। आखिरकार अंग्रेजी फौज को छोड़कर भागना पड़ा। कस्बे के पहलवान मंगल खां, रुस्तम खां, गुलामी खां, दिलावर खां, मुहम्मद खां, चाहरम खां आदि कई जंगे आजादी के सिपहसालारों ने देश को गुलामी से मुक्ति दिलाने में खास भूमिका निभाई।

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