जीवट स्वरूप को पाना जीवन का मकसद

Badaun Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
बदायूं। चिदर्पिता अतीत में खो जाना चाहती हैं। फेसबुक पर अपने जीवट स्वरूप को पाना उन्होंने जीवन का मकसद बताया है। मित्रों से कहा है कि वे उनके लिए दुआ करें। अपनी दिनचर्या का जिक्र तो उन्होंने किया है लेकिन बीपी गौतम के बारे में कोई टीका-टिप्पणी नहीं। फेसबुक पर चिदर्पिता की तीन दिन बाद खामोशी टूटने से यह साफ हो गया है कि वह दोबारा साध्वी बनने जा रही हैं। ये संभावना विवाद के बात अमर उजाला में प्रकाशित खबर में पहले ही जताई गई थी।
बीपी गौतम से जुदाई के बाद चिदर्पिता क्या करेंगी और कहां जाएंगी, लोगों में चार दिन से कौंध रहे इन सवालों और कयासबाजी को चिदर्पिता के इस पोस्ट ने विराम दे दिया है। पोस्ट के मुताबिक वह मानसिक और शारीरिक रूप से काफी परेशान हैं और भगवान शिव की आराधना करके अपना पुराना स्वरूप यानी मुमुक्ष आश्रम में साध्वी की तरह रहकर जीवन बिताने की प्रार्थना कर रही हैं। मानसिक परेशानी का प्रमाण है कि उन्होंने खुद कहा है कि तीन दिन बाद सोमवार की रात उन्हें फेसबुक से जुड़े अपने दोस्तों की सुध आई और अपना दर्द बांट लिया। चिदर्पिता ने दोस्तों को यह तो बता दिया है कि वह परेशान हैं लेकिन परेशानी क्या है, इसे खुद जाहिर नहीं किया बल्कि दोस्तों से भी पूछने को मना कर दिया है।


जैसा चिदर्पिता ने फेसबुक पर लिखा
तन, मन और आत्मा तीनों छलनी हैं। कुछ समय के लिए एकांतवास में हूं, मन के लिए शिवपूजन, ध्यान और तन स्वस्थ करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार और संतुलित भोजन ले रही हूं। इस समय सब भुलाकर जीवन का एक ही उद्देश्य है कि अपने जीवट स्वरूप को वापस पा लूं। आज तीन दिन बाद सुध आई तो सबसे पहले आपकी याद आई। क्योंकि आप लोग मेरी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुकेहैं। मुझे इस समय आप सभी की शुभकामनाओं की बहुत जरूरत है। इसके सिवा कुछ और कहने का मन नहीं कर रहा, मित्र हैं तो पूछिएगा भी नहीं। बस एक दुआ अपनी इस मित्र के नाम कर दीजिए।

मध्यरात्रि में बताया दर्द
चिदर्पिता ने फेसबुक पर दोस्तों को अपना दर्द सोमवार की मध्यरात्रि में लगभग दो बजे बताया है। यह वो वक्त है जब आम इंसान नींद की आगोश में होता है।

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