...ये रिश्ता क्या कहलाता है

Badaun Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
सूर्यप्रकाश गुप्त
बदायूं। किसी ने सच ही कहा है कि कानून और परंपरा का निरादर करके किया गया कोई भी काम अवैध और बदनामी का सबब बन जाता है। ऐसा ही कुछ गौतम-चिदर्पिता प्रकरण में साफ झलक रहा है। समाज को ठेंगा दिखाकर पूर्व पत्नी के जीवनकाल में किए गए दूसरे विवाह के बाद यदि गौतम दोषी हैं तो पूर्व विवाहित पुरुष से शादी करने वाली चिदर्पिता भी कम दोषी नहीं हैं।
हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधान के अंतर्गत पहली पत्नी के जीवन काल में दूसरा विवाह अवैध एवं शून्य है। अपवाद स्वरूप दूसरे विवाह को कानून तभी मान्यता देगा जब पूर्व पत्नी या पति जीवित न हो। यदि जीवित हो भी तो तलाकशुदा हो।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बिना विवाह साथ रह रहे वयस्क महिला और पुरुष को (लिव इन रिलेशन) के अंतर्गत पति-पत्नी की मान्यता दी है। इस लिहाज से तो दूसरा विवाह अवैध ही ठहराया जाएगा। भारतीय दंड विधान की धारा 494 भी हिंदुओं की इस मान्यता और प्रथा का समर्थन करता है। इसके अंतर्गत कानून निर्माताओं ने भी दूसरे विवाह को अपराध की संज्ञा दी है।

हिंदू विवाह एक अनुष्ठान
वेद, उपनिषद और पुराणों के अनुसार हिंदू विवाह एक अनुष्ठान है, जिसमें अग्नि को साक्षी मानकर मंत्रोच्चारण के बीच वर-वधू का पाणिग्रहण होता है। जिसके साक्षी समस्त देवी देवता, चारों दिशाएं, धरती, आकाश और परिजन होते हैं लेकिन हाइटेक जमाने में पूरा संस्कार कैमरे में कैद हो जाता है जो महत्वपूर्ण साक्ष्य की पूर्ति करता है।
दहेज उत्पीड़न का यह मामला सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुआ है। एसओ सिविल लाइंस सतीश यादव का कहना है कि महिलाओं से संबंधित सभी वादों की विवेचना महिला थाने को स्थानांतरित कर दी जाती है। जांच महिला थाने पहुंच गई है।

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