पब्लिक स्कूलों में नहीं हुए गरीब बच्चों के प्रवेश

Badaun Updated Mon, 06 Aug 2012 12:00 PM IST
बदायूं। पब्लिक स्कूलों में गरीब बच्चों को प्रवेश देने का फैसला शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत किया गया था। ये भी नियम था कि यह बच्चे अपने नजदीक वाले ही स्कूल में प्रवेश ले सकेंगे, लेकिन अधिकांश स्कूलों में इन बच्चों के प्रवेश ही नहीं हुए। अधिनियम का पालन कराने वाले शिक्षा महकमे के पास ऐसे बच्चों के आंकड़े ही नहीं हैं। हालांकि विभाग का कहना है कि स्कूलों से जानकारी मांगी जा रही है। वहीं स्कूल प्रशासन का कहना है कि उनके पास प्रवेश के लिए किसी बच्चे ने संपर्क नहीं किया।
पिछले साल शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ था। इसके तहत सभी बच्चों के लिए नि:शुल्क शिक्षा कर दी गई। किसी बच्चे से न तो फीस ली जाएगी और न कोई अन्य शुल्क। यह भी रास्ते खुल गए थे कि गरीब परिवारों के बच्चे अपने नजदीकी प्राइवेट विद्यालयों में प्रवेश ले सकते हैं, उनसे खर्चा वहन नहीं होगा। एक विद्यालय में 25 फीसदी ऐसे बच्चों को प्रवेश देने के नियम हैं, लेकिन अधिनियम का पालन यहां नहीं हुआ।
जिले में लगभग 200 से अधिक प्राइवेट विद्यालय हैं, लेकिन अधिकांश विद्यालयों में एक भी बच्चे का प्रवेश नहीं हुआ। स्कूल संचालकों का कहना है कि उनके पास बच्चे प्रवेश को नहीं आए हैं, यदि आते तो उन्हें प्रवेश दिए जाते। डिप्टी बीएसए मंजुलता का कहना है कि स्कूल संचालकों को पत्र जारी किए जा रहे हैं, उनसे पूछा जा रहा है कि कितने गरीब बच्चों के प्रवेश उनके विद्यालयों में हुए।

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