पशु तस्करी पर रोक लगाने की चुनौती

Badaun Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
बदायूं। जिले में बिना परमिट केचल रहे वाहनों और पशुओं की तस्करी पर रोक लगाना किसी वर्दीधारी के बस की बात नहीं है क्योंकि डग्गामार वाहन और पशु तस्करी बंद करते ही रसूखदारों का दबाव बढ़ जाता है।
जिले में पशु तस्करी पर जितनी रोक बताई जाती है, उसी के मुताबिक दोगुने रफ्तार में तस्करी होती है। यहां के मवेशी रामपुर और बिजनौर तक ले जाए जाते हैं। इसमें तमाम सफेदपोश शामिल हैं। ट्रकों के जरिए आधी रात के बाद भोर का उजाला होने से पहले यह धंधा जोरों पर होता है। इसके रास्ते सहसवान से शुरू होते हैं तो बिसौली से चंदौसी होते हुए निकलते हैं। बीते वर्षों में सहसवान के एक नेता ने व्यक्तिगत तौर पर अपने कार्यकर्ताओं को लगाकर पशु तस्करी पर रोक लगा रखी थी। अब वह रोक खत्म हो चुकी है।
नाम न छापने की शर्त पर पुलिस महकमे के ही एक मुलाजिम ने कहा कि प्रतिबंधित पशुओं के मामले पकड़ने जाने पर ऊपर से दबाव पड़ता है। सिपाही नहीं मानता है तो थानेदार पर दबाव आता है।

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