सूचना काअधिकार अधिनियम का उड़ाया मखौल

Badaun Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
बदायूं। लोगों के पास सबसे सशक्त हथियार सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) है। इसके माध्यम से तमाम घोटाले और गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। कुछ हद तक इन पर लगाम भी लगा है, लेकिन कुछ अधिकारी अपनी कमियों को छुपाने के लिए आरटीआई के तहत सूचना गलत देते हैं। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। एक खंड शिक्षा अधिकारी ने स्कूल के निर्माण का जिम्मा महिला शिक्षक को दिया था, लेकिन याचिका के जवाब में विभाग ने उन्होंने शिक्षक का नाम दर्शाया है।
मामला प्राथमिक स्कूल ललबुझिया का है। इसके निर्माण का जिम्मा ब्लाक जगत के तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी ने प्राथमिक स्कूल बड़ा परसुरा की प्रधानाध्यापक अलका रानी को चार जनवरी को दिया था। उसमें यह भी दर्शाया है कि आप विद्यालय के प्रधानाध्यापक से प्रेषित धनराशि का चेक प्राप्त कर अविलंब मानकानुसार निर्माण कार्य कराना सुनिश्चित करें। इसकेे बाद कंडेला निवासी शैलेंद्र सिंह ने बीएसए से आरटीआई के तहत डाली याचिका में पूछा कि ब्लाक जगत में वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 में किन विद्यालयों में कितनी-कितनी लागत से क्या निर्माण कार्य कराए गए और निर्माण प्रभारी कौन हैं। इसका जवाब महकमे के अधिकारियों ने दिया है। उसमें प्राथमिक स्कूल ललबुझिया के अतिरिक्त कक्षा कक्षों का निर्माण प्रभारी उसी स्कूल के सहायक अध्यापक शैलेंद्र कुमार को दर्शाया है। जबकि तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी जगत ने अपने आदेश में निर्माण का जिम्मा महिला शिक्षक को दिया था।
बीएसए कृपाशंकर वर्मा का कहना है कि सूचनाएं सभी खंड शिक्षा अधिकारी से मांगी गई थी वहीं सूचनाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सूचना गलत है या सही, इसको दिखवाएंगे।

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