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देर से सही पर ऐसे ही न्याय की थी उम्मीद

Badaun Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
बाबू खां
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जरीफनगर (बदायूं)। गुन्नौर (संभल) के गांव फरीदपुर की शांति देवी को जब यह पता चला कि उसके बेटे दीनदयाल को आग में जिंदा जलाने वालों को फांसी की सजा हुई है तो उसकी आंखें भर आईं। दीनदयाल के भाई विजयपाल और सकटू ने घटनास्थल दिखाते हुए कहा कि अदालत पर उन्हें भरोसा था। मेरी आंखों के सामने मेरे भाई को जिंदा आग में झोंका गया। जो बात बैठकर सुलझाई जा सकती थी, उसे प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया गया। बिरादरी एक ही थी यादव, फिर भी मामूली बात का ऐसा बतंगड़ बनाया गया कि दो मासूमों की जान ले ली गई।
दीनदयाल के पिता हरनारायण ने फैसले पर संतोष जताते हुए प्रतिक्रिया दी, ‘जैसी करनी वैसी भरनी’। हालांकि जिस तरह लोगों ने दीनदयाल और अनीता को मारा है, उसके लिए फांसी की सजा कम है लेकिन इससे बड़ी कोई सजा भी तो नहीं।

अनपढ़ दीनदयाल सोता था खेत पर
गांव के हरनारायण यादव के चार बेटे और तीन बेटियों में दीनदयाल मझला था। इससे बड़े विजयपाल और सकटू हैं, जिनका विवाह हो चुका है। तीसरे नंबर पर दीनदयाल और सबसे छोटा पप्पू है। बहनें वीरवती, कुसुमा और गायत्री का विवाह हो चुका है। दीनदयाल ने पढ़ाई नहीं की। वह मवेशियों को चराकर खुद खाना खाकर खेत पर बने छप्पर में सो जाता था। 22 मई की रात अनीता के पिता और परिवार के लोगों ने दीनदयाल को छप्पर से खींचकर उसके हाथ-पांव बांध दिए और गढ़ासे से हमला कर अधमरा कर दिया। इसके बाद जलाए गए उपले में झोंक दिया। इसी दौरान भाई सकटू और अन्य लोग पहुंचे तो आरोपियों ने तमंचे से फायर कर डराया और भगा दिया।

दो साल से चल रहा था प्रेम प्रसंग
कक्षा दो तक पढ़ने के बाद स्कूल छोड़ चुकी अनीता से दीनदयाल का दो साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। घरवालों को घटना से एक हफ्ते पहले ही इसका पता चला था। अनीता के पिता नत्थू और परिवार के लोगों ने दीनदयाल के घर पर चढ़ाई की। दीनदयाल के घरवालों ने बात को सुलझा लेने को कहा लेकिन नत्थू पक्ष नहीं माना। घटना की शाम अनीता और दीनदयाल के बीच बात होती अनीता के घर वालों ने देखी थी। यही बात इन दोनों का काल बन गई।

दोनों ने मांगी थी जान की भीख
दीनदयाल के घरवालों के अनुसार अनीता के घर वालों ने जब दीनदयाल को बाल पकड़कर खींचते हुए ले गए। हाथ-पैर बांधकर उसको और अनीता को जलते ऊपलों पर झोंकने की तैयारी कर रहे थे तो दोनों ने गिड़गिड़ाते हुए जान की भीख मांगी थी। लेकिन वे नहीं पसीजे।

अनीता के घरवाले जा चुके गांव छोड़कर
फरीदपुर गांव के लोगों के मुताबिक घटना के बाद ही अनीता के पिता नत्थू ने अपने हिस्से की अधिकतर जमीन और मकान बेच दिया और पत्नी एवं अन्य सदस्यों को लेकर थाना मुजरिया क्षेत्र के गांव मकुइया में बस गया था।

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