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ऑनरकिलिंग में सात को फांसी की सजा

Badaun Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
बदायूं। गुन्नौर तहसील के फरीदपुर गांव में करीब छह साल पहले प्रेमी युगल को जिंदा जला देने के मामले में षष्ठम अपर सेशन जज की अदालत ने सात लोगों को फांसी की सजा सुनाई है। सभी आरोपी लड़की पक्ष के हैं और पहले से ही जेल में बंद हैं।
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ऑनर किलिंग की रिपोर्ट मारे गए युवक दीनदयाल के भाई सकटू ने 23 मई को थाना गुन्नौर में दर्ज कराई थी। सकटू के मुताबिक 22 मई 2006 की रात दस बजे गांव के बाहर खेत में सोते हरनारायन के बेटे दीनदयाल को नत्थू सहित इनके परिवार के राकेश, वीरेश, सगे भाई जयप्रकाश और पप्पू तथा महावीर एवं गुलाब सिंह (सगे भाई) ने पकड़ लिया। इसी बीच नत्थू अपनी बेटी अनीता को भी पकड़ लाया। आरोपियों ने अनीता और दीनदयाल के हाथ-पैर बांधकर उन्हें जलती हुई आग में झाेंक दिया। शोर मचाते हुए दीनदयाल के परिवार के लोग पहुंचे तो आरोपियों ने फायरिंग कर उन्हें खदेड़ दिया और तब तक वहां खड़े रहे जब तक दोनों के शरीर कंकाल में तब्दील नहीं हो गए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। तभी से सभी आरोपी जेल में हैं।
सोमवार की सुबह षष्ठम अपर सेशन जज एसएन त्रिपाठी की अदालत में चली बहस के दौरान लड़की के पिता नत्थू ने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा कि घटना वाली रात अन्य आरोपियों ने उनके घर में घुसकर अनीता की लगुन का सामान और 31 हजार रुपये लूट लिए और अनीता को पकड़कर जंगल में ले गए। वहां पहले से जल रही आग में उसकी लड़की को जिंदा झोंक दिया। नत्थू की इस दलील को अदालत ने सिरे से नकार दिया। अदालत ने इसे विरल से विरलतम मानते हुए कहा कि झूठी शान के नाम पर प्रेमी युगल दीनदयाल और अनीता की निर्दयता से हत्या और पूरी तरह जलाकर साक्ष्य मिटाना गंभीर अपराध है। इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। ऐसी परिस्थितियों में मृत्युदंड दिया जाना ही पर्याप्त हो सकता है, जो तालिबानी आदेश वाली पंचायतों के मन में भय भर सके और भविष्य में ऐसे घटना की पुनरावृत्ति रोकने में सक्षम हो सके। कोर्ट ने गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नत्थू सहित सातों अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाने के साथ ही सभी पर 34-34 हजार का जुर्माना भी लगाया है। अब हाईकोर्ट में अपील करने के लिए सभी अभियुक्तों को पहले जुर्माने की राशि जमा करनी पड़ेगी।
जिले की किसी अदालत से एक ही मामले में सात लोगों को फांसी की सजा सुनाए जाने का यह पहला मामला है। हालांकि इससे पहले जिले की विभिन्न अदालतों से अलग-अलग मुकदमों में 16 लोगों को फांसी की सजा हो चुकी है।

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