....और तीन महीने में नहीं बन पाया नया राशनकार्ड

Badaun Updated Sun, 29 Jul 2012 12:00 PM IST
बदायूं। मौजूदा राशनकार्ड तो वर्ष 2010 में अवैध हो चुके हैं लेकिन उनकी जगह पर अभी तक नए राशनकार्ड जारी नहीं किए जा सके हैं। अभी अप्रैल 2012 में प्रमुख सचिव ने पहले सभी राशनकार्ड नए सिरे से जारी करने का फरमान जारी किया था। यहां पूर्ति विभाग ने इस प्रक्रिया को शुरू करते हुए सभी एसडीएम, बीडीओ और क्षेत्रीय खाद्य अधिकारियों से सूचनाएं मांगनी शुरू की। इस बीच, 28 मई को सरकार ने पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए सारी कवायद पर पानी फेर दिया है, जिससे नए राशनकार्ड जल्द मिलने की उम्मीद भी समाप्त हो गई है।
शासन हर साल पांच साल के लिए राशनकार्ड जारी किए जाते हैं। जिले में 73322 बीपीएल, 45221 अंत्योदय के साथ ही 537642 एपीएल राशन कार्ड हैं। यह सभी राशनकार्ड वर्ष 2005 में जारी हुए थे। तय समय सीमा के आधार पर ये सभी कार्ड वर्ष 2010 में अवैध हो चुके हैं। इसके बावजूद सरकार इन पुराने राशनकार्डों को नहीं बदल सकी है। अभी अप्रैल 2010 में प्रमुख सचिव बलविंदर सिंह ने नए राशनकार्डों की गाइड लाइन जारी करते हुए यह निर्देशित किया था कि राशनकार्डों का मुद्रण हस्तलिखित न होकर कम्प्यूटर से होगा। डिजिटलाइज्ड प्रविष्टियों को बैंक की पासबुकों की भांति राशनकार्ड के प्रारूप या कम्प्यूटर से अंकित कराया जाना चाहिए। इधर, शासन के नए निर्देश का अनुपालन शुरू कराते हुए नए राशनकार्डों के लिए सभी एसडीएम, बीडीओ और क्षेत्रीय खाद्य अधिकारियों से रिपोर्ट मांगने के साथ ही अन्य तैयारियां शुरू ही की थी कि इस बीच 28 मई को खाद्य एवं रसद विभाग के आयुक्त ने नए राशनकार्ड की पूर्व प्रक्रिया को निरस्त कर दिया और पुराने राशनकार्डों की वैधता छह माह के लिए बढ़ा दी है। उसके बाद से ही नए राशनकार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है।

तमाम फर्जी राशनकार्डों का लेखाजोखा नहीं
प्रशासन ने मई माह में सभी राशनकार्डों का सत्यापन कराया था, जिसमें जिलेभर में मिले 4629 एपीएल, 2182 बीपीएल और 1565 अंत्योदय राशनकार्ड अपात्र पाए गए थे। इन सभी राशनकार्डों को निरस्त कर दिया गया था। हालांकि लोगों का कहना है कि यह तो सिर्फ सरकारी रिपोर्ट है। अभी भी बड़ी संख्या में राशनकार्ड फर्जी हैं। इसका लेखाजोखा जिला पूर्ति विभाग के पास नहीं है।

नए राशनकार्डों के संबंध में अभी शासन से कोई नया निर्देश नहीं मिला है। अगर इस बाबत कोई गाइड लाइन मिलती है तो उसे पर फौरन अमल किया जाएगा।
नीरज कुमार सिंह, डीएसओ

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