बिजली कनेक्शन के स्थायी विच्छेदन में खेल

Badaun Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

उझानी(बदायूं)। बिजली महकमे के खेल भी बड़े निराले हैं। कोई बिलों में गडबड़ी से परेशान है तो किसी का बकाया जमा करने पर भी कनेक्शन नहीं कट पाता। ऐसा ही करीब पांच साल पुराना मामला रिसौली के उस व्यक्ति से जुड़ा सामने आया है, जिसकी तीन साल पहले मौत भी हो गई। पर वह आज भी बिजली महकमे का बकाएदार है।
विज्ञापन

रिसौली निवासी छोटेलाल के नाम बिजली का घरेलू कनेक्शन था। उस पर कई बिल बकाया थे। एक मुश्त समाधान योजना के तहत उसने 27 जून-2007 में तीन हजार रुपये जमा कर दिया। भुगतान की रसीद पर ही उसे पीडी (स्थायी विच्छेदन) लिखकर थमा दी गई। साथ ही उसने अन्य औपचारिकताओं को भी पूरा कर लिया था। करीब एक-डेढ़ साल तक सब कुछ सामान्य भी रहा। इसके बाद बकाया के बिल आने लगे। बकाया करीब 28 हजार रुपये पहुंच गया है। तीन साल पहले बकाएदार की स्वभाविक मौत भी हो चुकी है।
मृतक के दामाद नगर के मोहल्ला अहीरटोला निवासी धर्मेंद्र कुमार सक्सेना ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में वह चश्मदीद रहा। बताया कि अब छोटेलाल के खिलाफ आरसी भी जारी हो चुकी। जबकि मृतक के परिजन पीडी लिखी रसीद अफसरों को दिखाते घूम रहे हैं। धर्मेंद्र की मानें तो बकाया के मामले में छोटेलाल को गुमराह किया गया था। बोला-एक्सईएन से शिकायत कर दी गई है। रसीद के आधार पर महकमा ने कार्रवाई नहीं की तो वह कोर्ट की शरण भी लेगा। यहां बता दें कि बिलों और बकाया को लेकर कुछ इसी तरह के मामले पूर्व में भी सामने आ चुके हैं।
कनेक्शन के स्थायी विच्छेदन की जो प्रक्रिया है, वह छोटेलाल के मामले में संभवत: अपनाई नहीं गई। कनेक्शन कटवाने को पहले डेढ़ सौ रुपये की रसीद कटनी चाहिए। बिल का बकाया जमा होने के साथ उपभोक्ता को समर्पण की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ती है। फिर भी वह मामले की जानकारी हासिल करेंगे।
-अनुराग वर्मा, एसडीओ, उझानी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us