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एसएफसी घिरी, तीन सप्ताह बाद भी स्थिति साफ नहीं

Badaun Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के रखे हजारों क्ंिवटल गेहूं के बोरों पर कोड नंबर न डालने के मामले में एसएफसी जवाब देने से बच रही है, जिससे उसकी भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूर्ति विभाग ने एसएफसी गोदाम में जुलाई माह के रखे गेहूं के बोरों पर कोड नंबर ही न डाले जाने का एक बड़ा मामला पकड़ा है। इस पर डीएसओ ने एसएफसी के जिला प्रबंधक से स्पष्टीकरण तलब किया है। जबकि तीन हफ्ते बाद भी एसएफसी की ओर से स्थिति साफ नहीं की गई है।
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एसएफसी हर माह कोटे की दुकान के लिए अनाज का आवंटन करता है। प्रत्येक महीने के अनाज का पूरा उठान हो जाए, इसके लिए कोड नंबर की व्यवस्था तैयार की गई है, जिसके तहत हर माह अनाज की बोरी में वही कोड नंबर डाले जाते हैं। जबकि पिछले माह जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह ने डीएम के निर्देश पर एसएफसी गोदाम पर छापा डाला तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली निकली। गेहूं के किसी बोरे पर जुलाई माह का कोड नंबर ही नहीं पड़ा हुआ था। गेहूं उठान में गड़बड़ी की आशंका यही से शुरू हो गई, जिस पर डीएसओ ने एसएफसी के जिला प्रबंधक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण सप्ताहभर के अंदर देने का निर्देश दिया। इधर, इस बड़े मामले को एसएफसी का रवैया यह है कि नोटिस जारी किए हुए करीब तीन हफ्ते का वक्त बीत चुका है लेकिन अभी तक पूर्ति विभाग को उसने अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। ऐसे गंभीर मामले में एसएफसी का यह रवैया कई सवाल खड़े कर रहा है।


फिर से जारी किया गया रिमाइंडर
गेहूं के बोरों पर कोडिंग न करने के मामले में एसएफसी के जवाब न देने से पूर्ति विभाग ने एक बार फिर रिमांइडर जारी कर दिया है। जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि एसएफसी के जिला प्रबंधक को रिमाइंडर जारी कर दिया गया, ताकि वह अपना जवाब जल्द से जल्द दाखिल कर दें।

पीडीएस के अनाज के बोरों पर कोड नंबर तो हर हाल में डाले जाने चाहिए। एसएफसी जवाब देने में देरी कर रही है। ऐसा ज्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मयूर माहेश्वरी, डीएम

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