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सरकारी जमीन पर दे दी निजी स्कूल को मान्यता

Badaun Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। बेसिक शिक्षा विभाग की कारगुजारी किसी से छिपी नहीं हैं। एक और ऐसा ही मामला सामने आया है जो चौंकाने वाला है। वर्ष 2004 में विभाग ने एक प्राइवेट स्कूल को सरकारी जमीन पर स्थाई मान्यता दे दी। इतना ही नहीं भवन भी सरकारी ही था। इस जमीन पर बने भवन में पहले प्राथमिक स्कूल संचालित था, जो दूसरी जगह उसी के पास स्थापित हो गया। आठ साल से प्राइवेट स्कूल धड़ल्ले से चल रहा था। ग्रामीणों की शिकायत पर बीएसए की जांच में इसका पर्दाफाश हुआ।
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मामला ब्लाक जगत के गांव खिरिया रहलू स्थित महात्मा गौतम बुद्ध ज्ञानपीठ विद्यालय का है। इसको 20 अप्रैल 2004 में तत्कालीन बीएसए बीएल गौतम ने कक्षा पांच तक की स्थाई मान्यता दी थी। उस दौरान यह नहीं देखा गया कि विद्यालय के पास अपनी भूमि और भवन है भी या नहीं। उसके बाद से तो बोर्ड लगाकर यह विद्यालय धड़ल्ले से चलता रहा। पिछले सप्ताह ग्रामीणों ने डीएम से शिकायत की तो उन्होंने बीएसए को जांच के लिए भेजा। जांच में शिकायत पुष्ट हुई तो उन्होंने तीन सदस्यीय टीम गठित कर फाइनल रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।

बीएसए कृपाशंकर वर्मा ने बताया कि प्राइवेट स्कूल के पास अपनी जमीन और भवन नहीं है। मान्यता कई साल पहले दी गई थी। भवन के लिए ग्राम शिक्षा समिति का किराया नामा लगाया गया है, जो गलत है। जांच के दौरान पाया कि चालू सत्र में कक्षा पांच में 127 और आठ में 47 बच्चे पंजीकृत मिले हैं। जबकि मान्यता प्राइमरी की है। इस भवन में पहले सरकारी प्राइमरी स्कूल संचालित था। तीन सदस्यीय टीम की रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

ये है मान्यता का नियम
प्राइमरी-जूनियर हाईस्कूल की मान्यता लेने के लिए संचालक के पास जमीन और भवन का होना अनिवार्य है। तभी स्थाई मान्यता मिलती है। यदि जमीन न हो और प्राइवेट भवन का किरायानामा लगाया गया है तो उसे अस्थाई मान्यता मिल जाती है, लेकिन इस प्रकरण में तो जमीन और भवन दोनों ही सरकारी हैं, फिर भी विभाग ने स्कूल को स्थाई मान्यता दे दी, जो आजीवन होती है। उसको रिनुअल नहीं कराना पड़ता है।

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