अवैध कटान में ठेकेदार समेत मालिक पर कार्रवाई

Badaun Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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उझानी(बदायूं)। रौली गांव के पास बाग से आम के एक दर्जन से अधिक पेड़ काट लिए जाने के मामले को वन महकमा ने सोमवार को संज्ञान में ले लिया। हालांकि ठेकेदार की शह पर बाग मालिक ने सबूत मिटाने की नीयत से खेत को जुतवा दिया है लेकिन महकमे ने ठेकेदार समेत बाग मालिक पर केस कर दिया है।
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रेंजर एसके श्रीवास्तव ने बताया कि बाग से आम के सूखे चार या पांच पेड़ काटने का ठेकेदार ने परमिट बनवाया था। जबकि काटे गए पेड़ों की संख्या अधिक रही। पेड़ भी हरे भरे थे। वन कर्मियों की टीम मौके पर भेजकर इसकी सच्चाई का भी पता लगवा लिया गया। ठेकेदार और बाग मालिक के खिलाफ महकमे ने मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही महकमा काटे गए आम के पेड़ों की लकड़ी बरामदगी के प्रयास में है। यहां बता दें कि रविवार को गांव रौली के एक व्यक्ति के गढ़ी-रिसौली रोड स्थित बाग से आम के पेड़ों को कटान हुआ था। बाग में अब महज चार पेड़ ही बचे हैं।
इस बीच सोमवार को लोग मौके पर पहुंचे तो उन्हें बाग में वह पूरी जगह जुती हुई मिली जहां आम के पेड़ थे। देखने से अब ऐसा भी नहीं लगता कि कभी बाग रहा होगा। ऐसा सबूत मिटाने के नीयत से किया गया है। यहां बता दें कि प्रशासन इन दिनों स्कूलों में पौधारोपण का अभियान चलाकर धरती पर हरियाली की बहाली को भी अभियान चला रहा है। वहीं दूसरी ओर हरियाली को नष्ट करने के लिए वन माफिया जुटे हुए हैं।
सिकंदराबाद और मढिया में भी कटे पेड़
कोतवाली क्षेत्र के गांव कुआडंाडा के मजरा मढिया में सुभाष गिरि के खेत में खड़ा आम का पेड़ सोमवार सुबह कटा पड़ा मिला। इसे इलाके के ही एक ठेकेदार ने बिना परमिट कटवा दिया लेकिन लकड़ी नहीं उठवा पाया है। जबकि मुजरिया क्षेत्र के गांव सिकंदाराबाद में नीम के चार पेड़ काटे गए हैं। दोनों प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ हैं।

भूमिका पर भी उठा सवाल
रौली गांव के पास बाग में आम के पेड़ों को काटे जाने की सूचना पुलिस को रविवार पूर्वाह्न ही मिल गई थी। बावजूद इसके पुलिस मौके पर नहीं पहुंची और न ही ठेकेदार को बुलाकार परमिट देखने की कोशिश की गई। बताते हैं कि पुलिस अगर वास्तविकता को देखती तो अवैध कटान की लकड़ी बरामद हो जाती या फिर कुछ पेड़ बच भी सकते थे।
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