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बिजली की ऑटोमेटिक मीटर रीडिंग योजना फेल

Badaun Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
बदायूं। दरवाजे पर दस्तक देकर बिजली विभाग का कर्मचारी मीटर की रीडिंग लेकर जाता है और बाद में बिल ज्यादा आने पर उसे कम करवाने के लिए उपभोक्ता बिजलीघर केचक्कर काटते हैं। इसी जहमत से बचने और उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए बनाई गई एएमआर (ऑटोमेटिक मीटर रीडिंग) योजना साकार नहीं हो पाई। फेल हुई योजना के तहत विभाग को अभी तक केवल कम्प्यूटर मिले हैं लेकिन उन्हें सर्वर रूम में नहीं लगाया गया। ऐसे में अघोषित कटौती से त्रस्त उपभोक्ताओं की गलत बिलिंग की समस्या का निदान भी नहीं हो पा रहा है। यह योजना नए वित्तीय वर्ष में पूरी हो जानी थी लेकिन अव्यवस्था के चलते अधूरी रह गई।
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उपभोक्ताओं को बिजली का गलत बिल आने पर विभाग के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए एक साल पूर्व आरएपीडीआरपी (रिस्ट्रक्यर्ड एक्सरेटिव पॉवर डेवलपमेंट रिसोर्स प्रोग्राम) के तहत बिजली विभाग को हाइटेक किया जाना था। इसके लिए घरों के बाहर लगाए गए इलेक्ट्रानिक रीडिंग मीटरों में एक सिम (जो नेटवर्क आधारित होगा) लगाया जाना था, इस सिम का संपर्क संबंधित बिजलीघर के सर्वर रूम से होना था। हर महीने विभाग के अधिकारी दफ्तर में बैठकर सभी उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग का पता लगाकर उन्हें एसएमएस के जरिए बिल की धनराशि की जानकारी देते। उपभोक्ता केबिल जमा करने के बाद उनके मोबाइल सेट पर एसएमएस के जरिए इसकी भी पुष्टि होना थी। इससे उपभोक्ता और विभाग के बीच पारदर्शिता बनी रहती।
एक साल पूर्व इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए आए बजट से विद्युत वितरण खंड कार्यालय में दो सर्वर रूम बनाए गए जा चुके हैं। शहर के सभी उपकेंद्रों के लिए पांच-पांच कम्प्यूटर भी आ चुके हैं लेकिन अभी तक योजना शुरू नहीं हो पाई है। नतीजतन निजी संस्था द्वारा हैंड बिलिंग सुविधा के बाद भी तमाम उपभोक्ताओं केबिल गलत आ रहे हैं।
मोबाइल नंबर भी नहीं हुए फीड
शहरी क्षेत्र के सभी उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर बिजली विभाग के रजिस्ट्रर में दर्ज किए जाने थे। इसके बाद नंबरों का डाटा कम्प्यूटर में फीड करने की जिम्मेदारी भी अधिकारियों को सौंपी गई थी, लेकिन अभी तक अधिकारियों ने उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर संकलित करना ही शुरू नहीं किया है।
कम्प्यूटर ज्ञान न होना भी एक वजह
बिजली विभाग में तैनात अधिकांश कर्मचारियों को कम्प्यूटर का ज्ञान नहीं है। जबकि इस योजना के शुरू होने पर कर्मचारियों को कम्प्यूटर के बारे में जानकारी होना जरूरी होगा। ऐसे में योजना शुरू होने के बाद भी अप्रशिक्षित कर्मचारियों की वजह से इसमें रोड़ा आएगा।

सर्वर रूम से लेकर रीडिंग मीटरों में सिम लगाने की जिम्मेदारी
हिंदुस्तान कम्प्यूटर्स नाम की संस्था को सौंपी गई है। फिलहाल हमें कम्प्यूटर मिल चुकेहैं। कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण लेने के निर्देश दिए हैं। संस्था के अधिकारियों से बात करके जल्द ही यह सुविधा शुरू कराई जाएगी।
आरसी गुप्ता, अधिशासी अभियंता

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