पास रहकर भी किसानों से दूर न रह जाए खाद

Badaun Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
अनूप गुप्ता
बदायूं। बफर गोदाम भरे रहने के बावजूद किसानों को खाद का अकाल झेलना पड़ सकता है। पैक्स समितियों को उधार खाद उपलब्ध कराने के लिए जो जिला सहकारी बैंक (डीसीबी) गारंटी देता है, वह खुद ही कंगाली के दौर से गुजर रहा है। रही सही कसर यूपी कोऑपरेटिव बैंक ने अभी तक डीसीबी को सीसी (कैश क्रेडिट)लिमिट न देकर पूरी कर दी है। ऐसे जटिल दौर से गुजर रही डीसीबी के सचिव/ महाप्रबंधक ने डीएम, एआर कोऑपरेटिव सहित कई अधिकारियों को पत्र लिखा है।
खाद बिक्री के लिए जिलेभर में 132 सहकारी समितियों का जाल बिछा हुआ है। इन सभी को डीसीबी बैंक गारंटी देते हुए पीसीएफ से खाद उपलब्ध करता है। मगर, इस बार बैंक की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। इसके अलावा यहां डीसीबी की यूपी कोऑपरेटिव बैंक से भी सीसी लिमिट अभी तक तय नहीं हुई है, जिससे उसे काफी राहत मिल सकती है। हालात यही रहे तो समितियों को डीसीबी बैंक गारंटी नहीं दे सकेगा, जिसके साथ ही समितियों पर खाद की आपूर्ति भी ठप हो जाएगी।

कैसे तय होती है समितियों की सीसी लिमिट
सभी सहकारी बैंकों की कैश क्रेडिट लिमिट तय होती है। सहायक निबंधक सहकारी समितियां और डीसीबी बैंक प्रबंधक मिलकर यह सीमा निर्धारित करते हैं। इसी सीमा में रहते हुए कोई समिति उधार खाद ले सकती है। लिमिट की एक साथ खाद की सप्लाई न होकर कई बार में दी जाती है।

अभी मुट्ठीभर ही जुटाई जा सकी रकम
प्रत्येक सहकारी समिति पर अगर एक ट्रक, जिसमें करीब 15 मीट्रिक टन खाद आती है, उसके दाम तकरीब चार से पांच लाख रुपये हो सकते हैं। इस तरह 132 समितियों के लिए आठ से नौ करोड़ की जरूरत है। जबकि अभी तक डीसीबी तीन करोड़ दस लाख 45 हजार का ही भुगतान कर सकी है। जाहिर है कि बैंक को अभी काफी रकम की जरूरत है।

वसूली अच्छी न होने से बैंक की आर्थिक हालत बेहद खराब है। यूपी कोऑपरेटिव बैंक से भी अभी लिमिट नहीं तय हो सकी है। समितियां अगर जल्द ही बकाया की रकम वापस कर दें तो समस्या नहीं खड़ी होगी।
मंागेराम, सचिव/ महाप्रबंधक, जिला सहकारी बैंक

यह बैंक की जिम्मेदारी है कि वह समितियों के लिए बैंक गांरटी को पूरा करे। अगर समितियों को खाद आपूर्ति प्रभावित होती है तो वह उच्चाधिकारियों को लिखा-पढ़ी करेंगे।
नरेंद्र कुमार, जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियां

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