लाखों किसानों के क्रेडिट कार्ड नहीं बने

Badaun Updated Wed, 04 Jul 2012 12:00 PM IST
बदायूं। सरकार की ओर से फरमान जारी हो गया कि 30 सितंबर तक हर किसान के हाथ में क्रेडिट कार्ड (केसीसी) होना चाहिए। ताकि वह बैंकों से कर्ज लेकर अपना फसलोत्पादन बढ़ा सके, लेकिन लाखों किसान ऐसे हैं जिनके केसीसी बने ही नहीं हैं। जबकि खरीफ की बुवाई सिर पर है। वह हर दिन बैंकों के चक्कर लगाते हैं। संबंधित विभाग के अधिकारियों को बताते हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। इसकी पोल तब खुलेगी जब अगले महीनों में नाबार्ड की टीम दिल्ली से आकर यहां दौरा करेगी।
आसानी से नहीं बनता कार्ड
किसान क्रेडिट कार्ड योजना का शुभारंभ छह साल पूर्व हुआ था। इस योजना के तहत किसानों को हर फसल के लिए बैंकों से ऋण दिया जाना था। इसके लिए किसानों को पहले फार्म भरना था। उसके बाद निर्धारित शुल्क देने के बाद केसीसी कार्ड बनता था। अभी तक जिले के लगभग ढाई लाख किसानों के कार्ड बने हैं। जबकि किसानों की संख्या 13 लाख पार बताई जा रही है। बताया जाता है कि इनमें से भी अधिकांश किसानों को फसल के लिए कर्ज लेने में पसीने छूटते हैं। आसानी से उन्हें ऋण नहीं मिल पाता।
54 हजार किसानों के कार्ड बनाने का मिला लक्ष्य
हर साल किसानों के क्रेडिट कार्ड बनाने का लक्ष्य मिलता है, लेकिन इसकी पूर्ति कागजों में हो जाती है। इस बार भी 54187 किसानों के कार्ड बनाए जाने का लक्ष्य मिला है, लेकिन यह कार्य अभी तक शुरु नहीं हो सका है, जबकि किसान निरंतर बैंकाें में चक्कर लगा रहे हैं।
धान, गेहूं के लिए मिलता है 35 हजार का कर्ज
हर फसल के लिए अलग-अलग कर्ज बैंकों से मिलता है। गेहूं और धान की फसल के लिए 33-35 हजार रुपये, मक्का के लिए 23 से 25 हजार, बाजरा के लिए 18 से 20 हजार, गन्ना के लिए 60 से 66 हजार तक, प्याज के लिए 35 से 38 हजार, शिमला मिर्च की फसल के लिए 60 से 65 हजार, मूंगफली के लिए 28 से 35 हजार और आलू की फसल के लिए 57 से 62 हजार तक का कर्ज देय है।
कोई सुनने वाला नहीं
बिनावर के किसान रामदीन, जगत के दाताराम और शेखूपुर के सुमेर का कहना है कि किसान क्रेेडिट कार्ड दो माह में नहीं बना है। हर दिन बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। खरीफ की बुवाई सिर पर है, ऐसे में किससे कर्ज लें। कोई अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है।

पहले किसान क्रेडिट कार्ड तीन साल के लिए जारी होता था, उसके बाद किसानों को नवीनीकरण कराना पड़ता था, लेकिन अब यह कार्ड पांच साल के लिए जारी होगा। उसके बाद ही नवीनीकरण होगा। बार-बार किसानों से अभिलेख भी नहीं मांगे जाएंगे। सूत्र बताते हैं कि कार्ड के लिए जो शुल्क किसानों को देना पड़ता था वह भी हटा दिया गया है।

30 सितंबर तक हर किसान के हाथ में केसीसी होने के निर्देश मिले हैं। जिन किसानों को कार्ड बनवाने के दौरान दिक्कत होती है वह विभाग में शिकायत करते हैं और हम बैंकों को अवगत कराते हैं।-एसके सक्सेना, डीडीएम नाबार्ड

हर किसान के क्रेडिट कार्ड सभी बैंक शाखाओं पर बनाए जा रहे हैं। निर्धारित तिथि तक सभी किसानों को कार्ड दिए जाएंगे।-डीके शर्मा, एलडीएम

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